संभल में सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने का अभियान अब नए और सख्त चरण में पहुंच गया है. पहले बुलडोजर चला, अब जिम्मेदारी तय हो रही है. मस्जिद, मदरसा और मकानों पर हुई कार्रवाई के बाद प्रशासन ने अवैध कब्जा करने वालों से भारी जुर्माना वसूलने और भुगतान न करने पर संपत्ति कुर्की तक की तैयारी कर ली है. इसे प्रशासन का 'एक्शन पार्ट-2' माना जा रहा है.
बीते रविवार से संभल जिले में सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक ढांचों और मकानों के खिलाफ प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की थी. अब उसी कार्रवाई को अगले स्तर पर ले जाते हुए प्रशासन ने अवैध कब्जा करने वालों पर आर्थिक शिकंजा कस दिया है. सरकारी जमीन पर मस्जिद, मदरसा और मकान बनाकर कब्जा करने वालों से लाखों रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई सरकारी संपत्ति को कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है.
संभल प्रशासन ने सलेमपुर सालार उर्फ हाजीपुर गांव और राया बुजुर्ग गांव में सरकारी जमीन पर बने ढांचों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. प्रशासन के मुताबिक सलेमपुर सालार (हाजीपुर) में मदीना मस्जिद पर 8 लाख रुपये, मदरसे पर 51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. राया बुजुर्ग गांव में गौसुलबरा मस्जिद पर 8 लाख रुपये और मदरसे पर 6 लाख रुपये का जुर्माना लगा है. तालाब की भूमि पर मकान बनाने वालों पर 1 लाख 24 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इन सभी मामलों में जुर्माने की वसूली के लिए तहसीलदार कार्यालय से आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की जाएगी.
पैसा नहीं दिया तो संपत्ति होगी नीलाम
प्रशासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर तय समय में जुर्माना जमा नहीं किया गया, तो रेवेन्यू कोर्ट की प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी. इसके अंतर्गत संबंधित लोगों की चल और अचल संपत्ति कुर्क की जाएगी और जरूरत पड़ने पर नीलामी भी की जाएगी. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करना कानूनन अपराध है और अब किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी.
खुद गिरी मस्जिद, चला बुलडोजर
बीते रविवार को सलेमपुर सालार और हाजीपुर गांव में सरकारी जमीन पर बनी मदीना मस्जिद को मस्जिद कमेटी ने खुद ही ध्वस्त कर दिया था. वहीं, गांव में सरकारी जमीन पर बने मदरसे पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था. इसी दिन राया बुजुर्ग गांव में भी सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को गिराया गया था. इसके बाद मंगलवार को तालाब की भूमि पर बने मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई.
तालाब की जमीन पर बने 40 से ज्यादा मकान
संभल के हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन इलाके के भूड़ा मोहल्ले में प्रशासनिक कार्रवाई ने लोगों की नींद उड़ा दी. यहां करीब 5 बीघा तालाब की भूमि पर 40 से ज्यादा मकान बने होने की पुष्टि हुई है. नायब तहसीलदार दीपक जुरैल लेखपाल और कानूनगो की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और तालाब की भूमि की पैमाइश कराई. जैसे ही प्रशासन की टीम पहुंची, इलाके में अफरा-तफरी मच गई. कई लोगों ने अपने-अपने मकानों को लेकर आशंका जतानी शुरू कर दी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पैमाइश पूरी होने के बाद अगला कदम तय किया जाएगा.
दादा मियां की मजार से सटी मस्जिद पर नोटिस
संभल में जारी कार्रवाई के बीच अब एक और संवेदनशील मामला सामने आया था. चौधरी सराय इलाके में स्थित दादा मियां की मजार से सटी कब्रिस्तान की भूमि पर बनी मस्जिद प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आ गई थी. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह लेखपालों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मस्जिद के मुतवल्ली मुहम्मद सुल्तान को 15 दिन के भीतर मस्जिद हटाने का अल्टीमेटम दिया.
साप्ताहिक बाजार पर भी सख्ती
प्रशासन ने मजार परिसर में बिना अनुमति लगने वाले साप्ताहिक बाजार को भी हटाने की चेतावनी दी है. स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि शुक्रवार को यहां बड़ी मजार लगती है, जिससे यातायात और आमजन को भारी परेशानी होती है. तहसीलदार ने मुतवल्ली को साफ कहा कि बिना अनुमति कोई बाजार नहीं लगेगा और नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई होगी. तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनता दर्शन के दौरान स्थानीय निवासियों की ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया था. शिकायत में कहा गया था कि कब्रिस्तान की भूमि पर मस्जिद बनाना इस्लामिक सिद्धांतों के भी खिलाफ है और इससे असुविधा पैदा हो रही है. उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष ने 15 दिन में खुद ढांचा हटाने की बात कही है. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी.
मुतवल्ली का दावा: मस्जिद 700 साल पुरानी
वहीं, मस्जिद के मुतवल्ली मुहम्मद सुल्तान ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यह मस्जिद कोई नई नहीं है, बल्कि 700 से 800 साल पुरानी है और उनके पुरखों के समय से यहां मौजूद है. उन्होंने कहा कि दादा मियां की मजार भी करीब 700 साल पुरानी है और मस्जिद उसी दौर की है. उनके अनुसार, उन्होंने कोई नया निर्माण नहीं कराया है. अब वह कानूनी सलाह लेकर आगे का कदम तय करेंगे. संभल प्रशासन का संदेश साफ है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह धार्मिक हो या निजी. बुलडोजर एक्शन के बाद अब जुर्माना, आरसी, कुर्की और नीलामी तक की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह कार्रवाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अभी कई और स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है.
अभिनव माथुर