'भागकर लौटी बहू की तरह अखिलेश को शिवपाल पर भरोसा नहीं...', ओम प्रकाश राजभर का तंज

सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 'हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे...' वाली लाइन अखिलेश यादव के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठती है. क्योंकि अखिलेश अपने आगे किसी को नेता नहीं बनने देना चाहते.

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अखिलेश पर राजभर का निशाना अखिलेश पर राजभर का निशाना

संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 11 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 4:58 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर अक्सर बयानों को लेकर चर्चा रहते हैं. वह अपने विरोधियों पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. इस कड़ी में उन्होंने फिर से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बदायूं से शिवपाल यादव के बेटे आदित्य को चुनाव लड़वाने पर तंज कसा. साथ ही सपा के मेनिफेस्टो को फर्जी बताया.  

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समाजवादी पार्टी का मेनिफेस्टो हवा हवाई: राजभर

ओम प्रकाश राजभर ने 'आज तक' से बात करते हुए कहा कि अखिलेश यादव 5 साल खुद मुख्यमंत्री रहे. जब हाथ में पॉवर थी तो जातिवार जनगणना नहीं कराई. सीखते नीतीश जी से, जैसे उनके हाथ में सत्ता थी तो उन्होंने जातिवार जनगणना करा दी. महिलाओं की बात करते हैं लेकिन सपा-कांग्रेस मिलकर भी महिला आरक्षण कानून को पास नहीं कर पाए. पिछड़ों की बात कर रहे हैं, पिछड़ों में 27 प्रतिशत आरक्षण को बांटकर जब देने की बात आई तो 5 साल याद नहीं आया. 

समाजवादी पार्टी के मेनिफेस्टो में 60% बातें केंद्र की है, जबकि केंद्र में तो उनकी सरकार बननी नहीं है फिर कैसे अपना मेनिफेस्टो लागू करेंगे. इसलिए इनके मेनिफेस्टो में दम नहीं है, सब हवा हवाई है. 

सपा के बदायूं उम्मीदवार को लेकर कही ये बात 

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बदायूं वाले मामले में राजभर ने कहा कि यह कटु सत्य है कि जब दरार पड़ जाती है तो वह मिटती नहीं है. दर्जनों बार मैंने सुना है कि उन्होंने (अखिलेश) शिवपाल जी को बीजेपी की B टीम कहा है. शिवपाल यादव अगर बड़े नेता होते, पार्टी के रणनीतिकार होते तो इतनी जल्दी प्रत्याशी नहीं बदले जाते. रणनीतिकार से सलाह कर लेते, बैठकर 100 बार सोच कर, तब टिकट फाइनल करते कि इस सीट पर किसको लड़ाया जाए कि हमारा प्रत्याशी मजबूती से चुनाव लड़े लेकिन यहां तो रोज टिकट ही बदल रहे. चाचा ने अपना ही टिकट बदल दिया है.

बकौल राजभर- शिवपाल यादव तो अखिलेश यादव को अपरिपक्व नेता कहते थे. जब देश और प्रदेश में राजनीतिक गठजोड़ की राजनीति चल रही हो, जब छोटे-छोटे दलों को जोड़कर सत्ता पाने की बात हो रही हो तो अखिलेश जी छोटे दलों को भगा रहे हैं. 
 
अखिलेश यादव पीडीए की बात करते हैं.  उसी पीडीए में चंद्रशेखर आजाद, ओमप्रकाश राजभर, संजय चौहान, दारा चौहान, पल्लवी पटेल, स्वामी प्रसाद मौर्य भी थे, लेकिन छोड़ गए न. 

अखिलेश पर तंज 

सुभासपा अध्यक्ष ने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि पीडीए के लोगों को उन्होंने भगाया है, किसी ने उनको छोड़ा नहीं है, मैं गवाह हूं. उन्होंने बकायदा चिट्ठी लिखकर मुझे तलाकनामा भिजवाया तो हमने उसको कबूल कर लिया. 

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'हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे...' यह बात अखिलेश यादव के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठती है. अखिलेश अपने आगे किसी को नेता नहीं बनने देना चाहते. हम भले ही आगे ना बढ़ पाए, नेता न बन पाए लेकिन आपको भी नहीं बढ़ने देंगे वाला काम है अखिलेश जी का. 

उन्होंने कहा कि राजभर आज बीजेपी के साथ भी लीडर की हैसियत में दिख रहा है. लेकिन अखिलेश हम लोगों को लीडर नहीं मानते हैं. वह कहते हैं कि सब लोग हमारे यहां लोडर बनकर रहो. 

जब परिवार से कोई औरत रूठ कर भाग जाए और फिर उसको मना कर ले आया जाए तो निगाह रखी जाती है कि फिर कब भाग जाएगी. एक शंका बनी रहती है, वही हाल अखिलेश जी के दिमाग में भी शिवपाल जी को लेकर बैठा है. कहीं शिवपाल जी बीजेपी के साथ न हो लें. अखिलेश को शिवपाल पर भरोसा नहीं है. 
 
ईद पर अखिलेश, अजय राय, ब्रजेश पाठक के साथ आने पर क्या कहा? 

राजभर ने आगे कहा कि हम जिस भी महापुरुष को पढ़ें सभी लोगों ने सामाजिक एकता और भाईचारे की ही बात कही है और सभी बातों का निचोड़ बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में ऐसा पिरोया है कि अगर हमें आपको वोट की ताकत नहीं दी होती तो यह नेता ईद पर एक जगह नहीं होते. यह वोट की ताकत है जो यह नेता इकट्ठे एक जगह खड़े हो जाते हैं. राजनीति के बड़े-बड़े पहलवान एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं. 

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