लखनऊ बना यूपी का पहला ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर, स्वच्छ भारत मिशन के तहत ऐतिहासिक उपलब्धि

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (SBM-U) के तहत यह मुकाम शिवरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुरू होने के साथ हासिल किया गया है. नवनिर्मित शिवरी प्लांट की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है. इसके चालू होने के बाद लखनऊ नगर निगम के पास अब तीन अत्याधुनिक कचरा प्रसंस्करण संयंत्र हो गए हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है.

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40 लाख की आबादी वाले लखनऊ से प्रतिदिन 2,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है. (Photo- ITG) 40 लाख की आबादी वाले लखनऊ से प्रतिदिन 2,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है. (Photo- ITG)

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:45 PM IST

शहरी स्वच्छता और सतत विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां नगर निगम द्वारा उत्पन्न होने वाले कचरे का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है. स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (SBM-U) के तहत यह मुकाम शिवरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुरू होने के साथ हासिल किया गया है. इसके साथ ही लखनऊ को औपचारिक रूप से ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप सिटी’ घोषित किया गया है.

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नवनिर्मित शिवरी प्लांट की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है. इसके चालू होने के बाद लखनऊ नगर निगम के पास अब तीन अत्याधुनिक कचरा प्रसंस्करण संयंत्र हो गए हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है. इस तरह शहर की कुल प्रोसेसिंग क्षमता 2,100 मीट्रिक टन प्रतिदिन से अधिक हो गई है, जिससे खुले में ताजा कचरा डंप करने की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो गई है.

बढ़ते शहर के लिए वैज्ञानिक समाधान

करीब 40 लाख की आबादी और लगभग 7.5 लाख प्रतिष्ठानों वाले लखनऊ से प्रतिदिन करीब 2,000 मीट्रिक टन नगर ठोस कचरा निकलता है. तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के कारण पैदा हो रही पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए नगर निगम ने वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी पर आधारित बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है.

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शहर भर से एकत्र किए गए कचरे को जैविक (लगभग 55 प्रतिशत) और अजैविक (करीब 45 प्रतिशत) हिस्सों में अलग किया जाता है. जैविक कचरे से कंपोस्ट और बायोगैस बनाई जाती है, जबकि अजैविक कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए छांटा जाता है या फिर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) में बदलकर सीमेंट और पेपर उद्योगों को भेजा जाता है.

अधिकारियों के अनुसार, शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की दक्षता 96.53 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि स्रोत पर कचरा पृथक्करण 70 प्रतिशत से अधिक हो चुका है. यह नागरिकों की बढ़ती भागीदारी और नगर निगम की परिचालन क्षमता को दर्शाता है.

लिगेसी वेस्ट पर बड़ी कामयाबी

लखनऊ ने वर्षों से जमा लिगेसी वेस्ट के निपटान में भी उल्लेखनीय प्रगति की है. कुल 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से अब तक 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा चुका है. इस प्रक्रिया में आरडीएफ, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरा, बायो-सॉयल और मोटे अंश जैसे उपयोगी पदार्थों की पुनर्प्राप्ति हुई है.

करीब 2.27 लाख मीट्रिक टन RDF देशभर के औद्योगिक संयंत्रों को सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा गया है. वहीं 4.38 लाख मीट्रिक टन मोटा अंश, 0.59 लाख मीट्रिक टन बायो-सॉयल और 2.35 लाख मीट्रिक टन C&D कचरा का उपयोग सुरक्षित लैंडफिलिंग और निचले इलाकों के भराव तथा बुनियादी ढांचे के विकास में किया गया है.

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इन प्रयासों के चलते 25 एकड़ से अधिक भूमि को कचरे से मुक्त कर पुनः उपयोग योग्य बनाया गया है, जिसे अब एक आधुनिक वेस्ट ट्रीटमेंट कॉम्प्लेक्स में तब्दील कर दिया गया है.

अगला कदम: वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

आने वाले समय में लखनऊ नगर निगम शिवरी में 15 मेगावाट क्षमता का वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है. यह संयंत्र प्रतिदिन 1,000 से 1,200 मीट्रिक टन RDF का उपयोग कर बिजली उत्पादन करेगा, जिससे आरडीएफ को लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित सीमेंट संयंत्रों तक भेजने की लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों में कमी आएगी.

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