यूपी सरकार बीते 4 साल से लखनऊ की जिस बेशकीमती जमीन को भू-माफिया और बिल्डर से वापस नहीं ले पा रही, उसमें एलडीए और लखनऊ पुलिस ने भी भू-माफियाओं की मदद की थी. साल 2018 में इस पूरे फर्जीवाड़े पर दर्ज कराई गई एफआईआर में जांच अधिकारी ने सिर्फ जमीन बेचने वाले को दोषी मान, दाऊ दयाल अग्रवाल और द लोटस बिल्डर को क्लीन चिट दे दी. फिलहाल, इस पूरे मामले में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के याचिकाकर्ता राहुल शुक्ला ने इस केस के जांच अधिकारी ने कैसे आरोपी व्यापारी और बिल्डरों को मदद की, इसकी शिकायत की है.
दरअसल, प्रदेश सरकार ने 50 साल पहले लखनऊ की जिस श्री योगेश्वर ऋषिकुल बाल विद्यापीठ जूनियर हाई स्कूल समिति को स्कूल संचालन के लिए 23 बीघा जमीन लीज पर दी थी, उस जमीन को संचालन समिति के सचिव सुब्रत मजूमदार ने टाइल्स व्यापारी दाऊ दयाल अग्रवाल और गोरखपुर के रहने वाले दी लोटस बिल्डर को गैर कानूनी ढंग से बेचने के मामले में शिक्षा समिति की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर में भी बड़ा खेल उजागर हुआ है. इसमें इस फर्जीवाड़े पर दर्ज केस के जांच अधिकारी और तत्कालीन सीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है. लखनऊ के बाजारखाला थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में नजअंदाज किए गए तथ्यों को लेकर लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त से दस्तावेजों के साथ शिकायत की गई है.
जानिए पूरा मामला
बता दें कि इस पूरे मामले में श्री योगेश्वर ऋषिकुल बालवेद विद्यापीठ के प्रिंसिपल महेश कुमार ने 4 अक्टूबर 2018 को लखनऊ के बाजार खाला थाने मे फर्जी दस्तावेजों के साथ धोखाधड़ी और जलसाजी की एफआईआर दर्ज करवाई थी. इस एफआईआर में समिति के पूर्व सचिव सुब्रतो मजूमदार, पूर्व मैनेजर राजीव बिसारिया के साथ जमीनों के खरीददार दाऊ दयाल अग्रवाल और दी लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर्स के मालिकन भी आरोपी थे.
बाजारखाला थाने में दर्ज कराई गई इस एफआईआर की जांच सब-इंस्पेक्टर दया शंकर द्विवेदी ने की. जांच में जमीन खरीदने वाले दाऊ दयाल अग्रवाल और द लोटस बिल्डर के मालिक ओम शंकर जायसवाल, राजेंद्र प्रसाद जयसवाल, ईश्वर प्रसाद जायसवाल, संगीता श्रीवास्तव और राकेश त्रिपाठी को यह कहकर क्लीन चिट दे दी कि सरकार ने जमीन स्कूल चलाने के लिए दी थी और स्कूल चल रहा है.
पुलिस ने अपनी जांच में उस दस्तावेजी फ्रॉड का जिक्र ही नहीं किया, जिसमें सरकार ने जमीन श्री योगेश्वर ऋषिकुल बालवेद विद्यापीठ को स्कूल चलाने के लिए दी थी लेकिन जब एलडीए से द लोटस बिल्डर की हाउसिंग कॉलोनी का नक्शा पास नहीं हुआ तो बिल्डरों ने मूल समिति से मिलती-जुलती नाम वाली दूसरी समिति श्री योगेश्वर ऋषिकुल शिक्षा समिति बना ली.
जांच अधिकारी ने इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड और 2004 वर्ग मीटर जमीन खरीदने वाले दाऊ दयाल अग्रवाल और 4 करोड़ 83 लाख में 11 बीघा जमीन खरीदने वाली द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर को जानबूझकर जमीन खरीदने का दोषी ही नहीं माना. उल्टे दाऊ दयाल अग्रवाल के ही बयान के आधार पर धर्मात्मा बताते हुए क्लीन चिट दे दी कि जो जमीन दाऊ दयाल अग्रवाल ने खरीदी उस पर गरीब, दाऊ दयाल के ही नौकर, रहते हैं और दाऊ दयाल अग्रवाल ने उस पर गोदाम बनाया है लेकिन छत नहीं डाली है.
जमीन की खरीद फरोख्त में गड़बड़ी
इतना ही नहीं इस पूरे जमीन की खरीद फरोख्त के फर्जीवाड़े में स्कूल असिस्टेंट टीचर नवनीत श्रीवास्तव की भूमिका को भी नही जांचा कि आखिर द लोटस बिल्डर में जयसवाल बंधु तो गोरखपुर के सरिया व्यापारी हैं लेकिन असिस्टेंट टीचर नवनीत श्रीवास्तव की पत्नी संगीता श्रीवास्तव द लोटस बिल्डर की पार्टनर कैसे बनी? जिसने सरकारी जमीन को 30 साल के लिए दूसरी शिक्षा समिति को लीज पर दे दी.
हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर करने वाले राहुल शुक्ला ने अपनी एप्लीकेशन में साफ लिखा है- श्री योगेश्वर ऋषिकुल बाल वेद विद्यापीठ को जो जमीन दी गई उसको बेचने में विद्यालय के ही असिस्टेंट टीचर नवनीत श्रीवास्तव की भूमिका पर कभी जांच ही नहीं हुई, जिसके इशारे पर इस सरकारी जमीन को इधर-उधर कर गोरखपुर के व्यापारियों, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, ओम शंकर जयसवाल, ईश्वर प्रसाद जायसवाल और राकेश कुमार त्रिपाठी की द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर को 4.83 करोड़ में बेच दी गई.
यह जमीन विद्यालय के ही असिस्टेंट टीचर नवनीत श्रीवास्तव की मिली भगत से और द लोटस के मालिकान की जानकारी में बेची गई. इस डील का ही नतीजा था कि कंपनी द लोटस बिल्डर ने जब सेठ एमआर जयपुरिया को स्कूल खोलने के लिए यह जमीन लीज पर दी तो उसमें पार्टनर के तौर पर नवनीत श्रीवास्तव की पत्नी संगीता श्रीवास्तव शामिल थी. यानी स्कूल के टीचर की पत्नी और द लोटस की पार्टनर संगीता श्रीवास्तव को इस बात की पूरी जानकारी थी कि जमीन सरकारी है, विवादित है. इसको ना बेचा जा सकता है, ना खरीदा जा सकता है और ना ही इसका उपयोग बदला जा सकता है.
चार करोड़ 83 लाख में बेच दी जमीन
बावजूद इसके सुब्रत मजूमदार से मिलकर नवनीत श्रीवास्तव और उसकी पत्नी ने गोरखपुर के द लोटस कंपनी के मालिकों को यह जमीन चार करोड़ 83 लाख में बेच दी. साथ ही जमीन का एक हिस्सा नवनीत श्रीवास्तव के बेहद करीबी व्यापारी दाऊ दयाल अग्रवाल को करीब 34 लख रुपए में बेच दिया. लखनऊ पुलिस ने जांच के दौरान जिस दाऊ दयाल अग्रवाल और द लोटस बिल्डर एंड कॉलोनाइजर को क्लीन चिट दी है उनको इस जमीन के खेल की नवनीत श्रीवास्तव और उसकी पत्नी संगीता श्रीवास्तव के जरिए पूरी जानकारी थी.
यही वजह थी की द लोटस बिल्डर का अपार्टमेंट बनाने का नक्शा जब एलडीए से नक्शा पास नहीं हुआ तो लोटस बिल्डर ने यह जमीन 30 साल की लीज पर गोरखपुर की शिक्षा समिति श्री योगेश्वर ऋषिकुल शिक्षा समिति को 30 साल के लीज पर दे दी. जिस पर आज एमआर जयपुरिया स्कूल फ्रेंचाइजी मोड में चलाया जा रहा है. इसमें संगीता श्रीवस्तव मैनेजमेंट की पदाधिकारी है. जमीन के एक हिस्से पर दाऊ दयाल अग्रवाल ने टाइल्स शोरूम का गोदाम खोल रखा है. दूसरे हिस्से पर बाबा बक्शी के साथी रहे वाजपेई ब्रदर्स ने कब्जा कर पार्किंग के साथ-साथ अवैध झोपड़ी बसा कर किराया वसूल रहे हैं.
फिलहाल, इस पूरे मामले में लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था उपेंद्र अग्रवाल का कहना है यह शिकयत फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आई है लेकिन अगर शिकायत आई होगी तो शिकायत में संबंधित थाने से रिपोर्ट और सभी तथ्यों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी.
संतोष शर्मा