हिंदू महिला डॉक्टरों को मुस्लिम बनाने वाला गैंग... यूपी के इन चार शहरों से मिली मदद, विदेशी फंडिंग का भी कनेक्शन

KGMU धर्मांतरण केस में गिरफ्तार डॉ. रमीज मलिक को लेकर जांच और तेज हो गई है. यूपी एटीएस ने लखनऊ पुलिस से पूरे नेटवर्क की विस्तृत जानकारी मांगी है. पूछताछ में रमीज के डॉक्टर शाहीन से संपर्क, फरारी के दौरान कई शहरों में नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन सामने आए हैं. जांच एजेंसियां अब उसे संरक्षण देने वालों की पहचान में जुटी हैं.

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डॉक्टर रमीज मलिक पर महिला डॉक्टरों के धर्मांतरण का आरोप है.(Photo: ITG) डॉक्टर रमीज मलिक पर महिला डॉक्टरों के धर्मांतरण का आरोप है.(Photo: ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) से जुड़े धर्मांतरण और महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण के मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है. इस हाई-प्रोफाइल केस में गिरफ्तार आरोपी डॉ. रमीज मलिक से जुड़ी ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी हैं. लखनऊ पुलिस की जांच में सामने आए इन इनपुट्स के बाद अब यूपी एटीएस भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है.

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सूत्रों के मुताबिक, यूपी एटीएस ने लखनऊ पुलिस से रमीज और उससे जुड़े पूरे नेटवर्क की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब जांच में आरोपी के देश-विदेश से जुड़े संपर्क, संदिग्ध मुलाकातें और संभावित संगठित रैकेट की ओर इशारे मिल रहे हैं. जांच में सामने आया है कि आरोपी रमीज का संपर्क डॉक्टर शाहीन सईद से रहा है. पूछताछ के दौरान खुद रमीज ने स्वीकार किया है कि उसकी डॉक्टर शाहीन से मुलाकातें हुई थीं. बताया गया है कि एक-दो कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों के बीच संपर्क हुआ और बाद में बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा. डॉक्टर शाहीन सईद का नाम पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है. वह दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार हो चुकी है. ऐसे में रमीज और शाहीन के बीच संबंध सामने आना जांच एजेंसियों के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. लखनऊ पुलिस पहले ही इस संबंध में यूपी एटीएस को इनपुट साझा कर चुकी थी. इसी जानकारी के आधार पर एटीएस ने मामले में सक्रियता बढ़ाई और अब पूरे नेटवर्क को खंगालने की तैयारी की जा रही है.

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फरारी के दौरान फैला संपर्क जाल

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तारी से पहले रमीज लंबे समय तक फरारी काटता रहा. इस दौरान वह सिर्फ एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सहारनपुर, मेरठ, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, शाहीन बाग और दिल्ली तक उसका आना-जाना रहा. सूत्रों के अनुसार, फरारी के इस दौर में रमीज कई डॉक्टरों के संपर्क में रहा और कानूनी सलाह भी लेता रहा. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये संपर्क महज व्यक्तिगत थे या किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा.

विदेशी कनेक्शन भी जांच के दायरे में

धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोपों में गिरफ्तार डॉ. रमीज मलिक के विदेशी कनेक्शन भी अब जांच के दायरे में आ गए हैं. लखनऊ पुलिस रमीज की विदेश यात्राओं का पूरा ब्यौरा जुटा रही है. बताया जा रहा है कि आगरा में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान और उसके बाद लखनऊ में नौकरी के समय रमीज कई बार विदेश गया. इन यात्राओं का उद्देश्य क्या था, किन देशों में गया और वहां किन लोगों से संपर्क हुआ. इन सभी बिंदुओं की गहन जांच की जा रही है.

आगरा से पीलीभीत तक फैला धर्मांतरण का मामला

जांच में यह भी सामने आया है कि रमीज ने आगरा में एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान धर्मांतरण के बाद एक हिंदू लड़की से निकाह किया था. इस निकाह की प्रक्रिया पीलीभीत में कराई गई थी. अब लखनऊ पुलिस उस काजी की तलाश कर रही है, जिसने निकाह कराया था, साथ ही निकाह के गवाहों की भी पहचान की जा रही है. जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि यह निकाह व्यक्तिगत मामला था या किसी बड़े धर्मांतरण रैकेट का हिस्सा.

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KGMU का एक और जूनियर डॉक्टर शक के घेरे में

केजीएमयू धर्मांतरण केस में अब एक और नाम सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, केजीएमयू के एक अन्य जूनियर डॉक्टर की तलाश की जा रही है, जो रमीज के बेहद करीबी बताया जा रहा है. जांच में यह बात सामने आई है कि इसी जूनियर डॉक्टर के कहने पर हॉस्टल में कई बार तकरीर करवाई गई थी. इन तकरीरों का उद्देश्य क्या था, इनमें कौन-कौन शामिल होता था और किन बातों पर जोर दिया जाता था. इन सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है. पुलिस को शक है कि यह जूनियर डॉक्टर रमीज के धर्मांतरण रैकेट में सक्रिय भूमिका निभा रहा था.

सेक्रेट रिपोर्ट और नए नाम रडार पर

रमीज की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ पुलिस ने एक गोपनीय रिपोर्ट जांच एजेंसियों को भेजी है. सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जांच एजेंसियों ने पाया है कि केजीएमयू से जुड़ी दो महिला स्टाफ और एक डॉक्टर फिलहाल रडार पर हैं. आरोप है कि ये लोग मिलकर मतांतरण रैकेट चला रहे थे और संस्थान के भीतर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे थे. इस पूरे मामले में केजीएमयू प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. सूत्रों का कहना है कि केजीएमयू प्रशासन से महिलाओं द्वारा कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन आरोप है कि इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया. अब जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि शिकायतों को नजरअंदाज क्यों किया गया और क्या इसमें किसी स्तर पर मिलीभगत थी.

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लव जिहाद नेटवर्क का सरगना कौन?

जांच एजेंसियां अब यह जानने में जुटी हैं कि इस पूरे कथित लव जिहाद नेटवर्क का सरगना कौन है. कौन लोग रमीज और उसके साथियों को संरक्षण दे रहे थे, किनके इशारे पर गतिविधियां चल रही थीं—इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार एक बड़े और संगठित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं.

KGMU प्रशासन की चुप्पी

इस गंभीर मामले में अब तक केजीएमयू के जिम्मेदार अधिकारी सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं. फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है, जिससे कई सवाल और गहरे हो गए हैं. जांच एजेंसियों की इन्वेस्टिगेशन में केजीएमयू के कई विभागाध्यक्षों (HoD) की संलिप्तता के संकेत भी मिलने की बात सामने आई है. हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है.

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