यूपी की राजधानी लखनऊ में बीजेपी के पूर्व सांसद ने पीजीआई अस्पताल में डॉक्टरों पर अपने बेटे का इलाज नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया है जिससे उसकी मौत हो गई. भैरो प्रसाद मिश्रा ने कहा कि वो डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे लेकिन उन्होंने इलाज नहीं किया. समय पर बेटे को इलाज नहीं मिलने की वजह से उसकी मौत हो गई.
मिश्रा ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने उनके बेटे को हाथ तक नहीं लगाया. बेटे की मौत के बाद नाराज पूर्व सांसद धरने पर बैठ गए. इसके बाद अस्पताल के डायरेक्टर और CEO ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन देकर बेटे के शव के साथ वहां से भेजा. इसके बाद अस्पताल के डायरेक्टर ने कमेटी बनाकर इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.
किडनी की बीमारी से पीड़ित था पूर्व सांसद का बेटा
जानकारी के मुताबिक़ भैरो प्रसाद मिश्रा चित्रकूट के रहने वाले हैं और बांदा लोकसभा सीट से 2014 में BJP के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बने थे. उनके बेटे प्रकाश मिश्रा को किडनी की बीमारी थी और PGI में उसका इलाज चल रहा था.
तबियत ज्यादा खराब होने पर रात ग्यारह बजे पूर्व सांसद अपने बेटे को लेकर इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे. आरोप है कि वहां पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफ़िसर ने उनके बेटे को भर्ती नहीं किया जबकि वह लगातार उससे बेटे को भर्ती कराने की गुहार लगाते रहे.
बेटे की मौत के बाद धरने पर बैठ गए पूर्व सांसद
हालांकि पूर्व सांसद के बेटे ने एक घंटे बाद ही दम तोड़ दिया. इससे नाराज भैरो प्रसाद मिश्रा इमरजेंसी वार्ड में ही धरने पर बैठ गए. इसकी जानकारी जब पीजीआई के निदेशक को दी गई तो वो मौक़े पर पहुंचे और उन्हें जांच का आश्वासन दिया. इसके बाद पूर्व सांसद अपने बेटे के शव को लेकर घर के लिए रवाना हो गए.
डायरेक्टर ने जांच के लिए बनाई कमेटी
पीजीआई के निदेशक डॉक्टर आर के धीमान के मुताबिक़ जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी बनाई है. इस कमेटी में डॉक्टर संजय राज, डॉक्टर DK पालीवाल और डॉक्टर RK सिंह शामिल हैं. उन्हें 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
यूपी सरकार ने डॉक्टर को पीजीआई से हटाया
वहीं इस मामले को लेकर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जानकारी दी है कि आरोपी डॉक्टर को कार्य मुक्त कर दिया गया है. ब्रजेश पाठक ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, 'पीजीआई, लखनऊ में पूर्व सांसद मा० भैरों प्रसाद मिश्र जी के सुपुत्र के दु:खद निधन के संबंध में यूपी सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. शुरुआती जांच में दोषी पाए गए संबंधित डॉक्टर को संस्थान से कार्य मुक्त किया जा रहा है. भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना हो इस संबंध में निदेशक, पीजीआई को चेतावनी भी दी गई है.'
आशीष श्रीवास्तव