UP: बैंड-बाजे के साथ बारात लेकर दुल्हन के दरवाजे पहुंचा दूल्हा, शादी का कार्ड देखने के बाद पता चला हो गई बड़ी गलती, फिर...

हमीरपुर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां शादी की तारीख से एक दिन पहले ही बारात दुल्हन के दरवाजे पहुंच गई. तय दिन से पहले अपने दरवाजे बारातियों को देखकर दुल्हन के घरवाले हैरान रह गए.

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हमीरपुर: एक दिन पहले पहुंच गई बारात (सांकेतिक फोटो) हमीरपुर: एक दिन पहले पहुंच गई बारात (सांकेतिक फोटो)

नाह‍िद अंसारी

  • हमीरपुर ,
  • 28 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां शादी की तारीख से एक दिन पहले ही बारात दुल्हन के दरवाजे पहुंच गई. तय दिन से पहले अपने दरवाजे बारातियों को देखकर दुल्हन के घरवाले हैरान रह गए. बारातियों के साथ दूल्हा और उसके घर के कई लोग मौजूद थे. बारातियों के आने पर दुल्हन के परिजनों और गांववालों ने मिलकर आनन-फानन में सारी व्यवस्थाएं कीं. ये घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.   

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दरअसल, हमीरपुर के सिकरोढ़ी गांव निवासी स्व. रामफल अनुरागी की पुत्री रेखा की शादी सदर कोतवाली के पारा पुरवा गांव के बेटाराम के साथ तय हुई थी. शादी की तारीख 27 फरवरी रखी गई थी. लेकिन बारात एक दिन पहले ही यानी 26 फरवरी को दुल्हन के दरवाजे पहुंच गई. जिसे देख हर कोई भौचक्का रह गया. 

कार्ड छपाई में हुई गड़बड़ी

बेटाराम (दूल्हे) की भाभी कौशिल्या ने बताया कि कार्ड छपाई में 27 की जगह 26 फरवरी की तारीख छप गई थी. उनके घर में कोई ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था. इसलिए किसी ने तारीख पर गौर नहीं किया और नाते-रिश्तेदारों को कार्ड बांट दिए गए. तय तिथि से पूर्व ही रिश्तेदारों का आना हो गया और 26 फरवरी को वह लोग बारात लेकर सिकरोढ़ी गांव पहुंच गए. वहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि शादी की तारीख 27 फरवरी रखी गई थी.  

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इधर, एक दिन पहले दरवाजे पर बारात देखकर लड़की वाले भी हैरान और परेशान हो गए. हालांकि, गांववालों की मदद से सारे इंतजाम किए गए और रीति-रिवाज से शादी सम्पन्न करवाई गई. 

रातोरात बारात के स्वागत की तैयारियां की गईं 

गांव निवासी अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि रेखा के पिता की मौत हो चुकी है. बारात एक दिन पहले आई तो सारा कार्यक्रम बिगड़ने लगा. लेकिन गांव के सभी लोगों ने मिलकर मदद की. रातोरात बारात के स्वागत-सत्कार की तैयारियां की गई. हलवाई लगाकर भोजन तैयार कराया गया. इसके बाद द्वारचार और जयमाल आदि की रस्में भी हुईं. 

मंगलवार की सुबह फेरे लिए गए और शाम होते-होते रेखा को हंसी-खुशी विदा कर दिया गया. इससे दोनों पक्ष संतुष्ट नजर आए और गांव का भी मान-सम्मान बच गया. फिलहाल, ये शादी आसपास चर्चा में है. 

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