अब किसी का घर नहीं टूटेगा... बुलडोजर एक्शन के 'सुप्रीम' फैसले पर बोले अखिलेश यादव

देश में बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. जिस पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अब किसी का घर नहीं टूटेगा.

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अखिलेश यादव (फाइल फोटो) अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • दिल्ली,
  • 13 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST

बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बगैर सुनवाई आरोपी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता है. बुलडोजर एक्शन पर मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अधिकारी भी मनमाने तरीके से काम नहीं कर सकते हैं. वहीं, अब इसको लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान आया है. उन्होंने कहा कि जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है मैं उसका स्वागत करता है.

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अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे कम फैसले होते हैं  जिसमें सरकार को जुर्माना देना पड़ता है . सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर न सिर्फ 25 लाख का जुर्माना लगाया है. बल्कि दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने को कहा है जिन्होंने निर्दोष लोगों के घर पर बुलडोजर चलाया है. जो घर तोड़ना चाहते हैं उनसे क्या उम्मीद करेंगे आप. आज के बाद उनका बुलडोजर खड़ा हो जाएगा और किसी का घर नहीं तोड़ेगा. 

यह भी पढ़ें: 'अफसर जज नहीं बन सकते', बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट, देखें एक और एक ग्यारह


अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी फैसले का किया स्वागत

बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं.बीजेपी की डबल इंजन सरकार द्वारा जनता को परेशान किया जा रहा है.सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं उन्हें मुआवजा दिया जाए और इसमें शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि इस मामले में मनमाना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अधिकारी मनमाने तरीके से काम नहीं कर सकते. बगैर सुनवाई आरोपी को दोषी नहीं करार नहीं दिया जा सकता है. जस्टिस गवई ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'अपना घर पाने की चाहत हर दिल में होती है. हिंदी के मशहूर कवि प्रदीप ने इसे इस तरह से कहा है. घर सुरक्षा परिवार की सामूहिक उम्मीद है. क्या कार्यपालिका को किसी आरोपी व्यक्ति के परिवार की सुरक्षा छीनने की अनुमति दी जा सकती है? यह हमारे सामने एक सवाल है.'

कोर्ट ने कहा कि मामले का दायरा सीमित है, मुद्दा यह है कि क्या किसी अपराध के आरोपी या दोषी होने पर संपत्ति को ध्वस्त किया जा सकता है? एक घर केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिए परिवार की सामूहिक उम्मीद का प्रतीक है.

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