जिसने 14 साल पहले बचाया था, उसकी बांहों में 'माउंटेन गोरिल्ला' ने ली आखिरी सांस

अपने 'आजीवन दोस्त' की बाहों में माउंटेन गोरिल्ला की मौत हो गई है. यह माउंटेन गोरिल्ला पार्क रेंजर के साथ सेल्फी खिंचवाने के बाद दुनिया भर में खूब पॉपुलर हुई थी. दरअसल, पूर्वी कांगो के विरुंगा नेशनल पार्क में अनाथ नदाकासी (माउंटेन गोरिल्ला) ने अपने 49 वर्षीय कार्यवाहक आंद्रे बाउमा की बाहों में अंतिम सांस ली.

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बाउमा की बाहों में नदाकासी की मौत (फोटो- विरुंगा नेशनल पार्क) बाउमा की बाहों में नदाकासी की मौत (फोटो- विरुंगा नेशनल पार्क)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST
  • 14 साल की उम्र में माउंटेन गोरिल्ला की मौत
  • बाहों में लिपटकर मरते हुए फोटो वायरल

अपने 'आजीवन दोस्त' की बाहों में माउंटेन गोरिल्ला की मौत हो गई है. यह माउंटेन गोरिल्ला पार्क रेंजर के साथ सेल्फी खिंचवाने के बाद दुनिया भर में खूब पॉपुलर हुई थी. दरअसल, पूर्वी कांगो के विरुंगा नेशनल पार्क में अनाथ नदाकासी (माउंटेन गोरिल्ला) ने अपने 49 वर्षीय कार्यवाहक आंद्रे बाउमा की बाहों में अंतिम सांस ली.

नदाकासी की 14 वर्ष की आयु में मौत हो गई थी. उसे विरुंगा रेंजर्स द्वारा तब बचाया गया था जब वह सिर्फ दो महीने की थी और अपनी मां के बेजान शरीर से चिपकी हुई मिली थी. उसकी मां को घंटों पहले सशस्त्र मिलिशिया ने मार गिराया था. 

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नदाकासी को बाद में उसे एक साथी अनाथ गोरिल्ला नेडेज़ के साथ पार्क के सेनक्वेकवे सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां यह जोड़ी 2019 में पार्क रेंजर मैथ्यू शामवु के साथ एक सेल्फी में दिखाई देने पर इंटरनेट में खूब पॉपुलर हो गई थी. 

इसी तस्वीर के कारण नदाकासी हुई थी पॉपुलर (विरुंगा नेशनल पार्क)

सेनक्वेकवे केंद्र में एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद सबकी 'प्रिय' गोरिल्ला की 'लंबी बीमारी के कारण मौत हो गई. 26 सितंबर को बाउमा की बाहों में नदाकासी की मौत हो गई, जिसने 14 साल पहले गोरिल्ला को बचाया था. उस वक्त भी बाउमा ने नदाकासी को अपनी बांहों में जकड़ लिया था, ताकि वह जिंदा रह सके.

नदकासी की अंतिम तस्वीर में उसे बाउमा की छाती पर अपना सिर रखे हुए देखा जा सकता है, जबकि बाउमा उसे पकड़ा हुआ है. बाउमा ने कहा, 'इस तरह के प्यार करने वाले प्राणी का समर्थन करना और उसकी देखभाल करना एक सौभाग्य की बात थी, विशेष रूप से यह जानते हुए कि नदाकासी ने बहुत कम उम्र में अपनी जान गंवा दी.'

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बाउमा ने कहा, 'मुझे गर्व है कि मैंने नदकासी को अपना मित्र कहा, मैं उसे एक बच्चे की तरह प्यार करता था और उसका हंसमुख व्यक्तित्व मेरे चेहरे पर मुस्कान ला देता था जब भी मैं उससे बातचीत करता था, विरुंगा में हम सभी को उसकी कमी खलेगी, लेकिन सेनक्वेकवे में उनके समय के दौरान हमारे जीवन में लाई गई समृद्धि के लिए हम हमेशा आभारी हैं.'

 

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