स्टडी: कर्मचारी मानते हैं बॉस नहीं करते काम

भारत के अधि‍कांश युवा कर्मचारियों को लगता है कि वो अपने बॉस से ज्यादा काम करते हैं और बॉस की बजाय उनका इंक्रीमेंट होना चाहिए. एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में ऐसे ही कुछ खुलासे किए गए है. जानिये सर्वेक्षण में और कौन सी बातें आईं सामने...

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ऑफिस में बॉस और कर्मचारी की प्रति‍कात्मक फोटो ऑफिस में बॉस और कर्मचारी की प्रति‍कात्मक फोटो

मेधा चावला

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

क्या आपको भी ऐसा लगता है कि आप अपने बॉस से ज्यादा काम करते हैं. तो ऐसा सोचने वाले सिर्फ आप नहीं है. एक हालिया सर्वे की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अधिकांश कर्मचारियों को ऐसा लगता है कि वो अपने बॉस से ज्यादा काम करते हैं.

वहीं कुछ कर्मचारियों को ऐसा भी लगता है कि बॉस की कुर्सी पर बैठते ही लोग निकम्मे हो जाते हैं. वो दूसरे कर्मचारियों के मुकाबले ऑफिस को कम समय देत हैं और उनकी तुलना में काम भी बहुत कम करते हैं.

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80 फीसदी से ज्यादा कर्मियों को ये लगता है कि बॉस के मुकाबले वो ज्यादा काम करते हैं.

यह खुलासा एक हालिया सर्वेक्षण में किया गया है, जिसे 'टैलेंटेडजी' नाम की दिल्ली आधारित एजुकेशन-टेक्नोलॉजी कंपनी ने किया है.

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 21 से 24 साल के 16 फीसदी कर्मी ऑफिस को 12 घंटे से ज्यादा समय देते हैं. जब कि सिर्फ 2 फीसदी बॉस ही ऑफिस को दूसरे कर्मचारियों के बराबर काम करते हैं.


सर्वेक्षण करने वाली फर्म 'टैलेंटेडजी' के सीईओ और एमडी आदित्य मलिक ने कहा कि भारत के युवा कर्मचारियों से बातचीत के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं.

आदित्य मलिक ने कहा कि कई अध्ययन के नतीजों में यह बात सामने आई है कि सप्ताह में 40 घंटों से ज्यादा काम करने वाले कर्मचारियों की काम करने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. लेकिन वास्तविकता में देखा जाए तो हर दफ्तर में कर्मचारी की क्षमता और उसकी काबिलियत का अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि वह दफ्तर को कितना समय दे रहा है और कितने घंटे एक्ट्रा काम कर रहा है.

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सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि 87 फीसदी कर्मचारी ये मानते हैं कि उनके बॉस को increment मिले या न मिले, उन्हें जरूर मिलना चाहिए.

यह सर्वेक्षण देश के आठ मेट्रो सिटी में किया गया.


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