कतर की राजधानी दोहा में शनिवार को अमेरिका और तालिबान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गया. करीब 18 महीने की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के बावजूद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है.
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दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को तालिबान के साथ हुए समझौते
की तारीफ करते हुए कहा कि वह जल्द ही तालिबानी नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर
मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि तालिबान शांति के लिए
तैयार है.
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इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने तालिबान को चेतावनी दी
कि अगर चीजें खराब हुईं, तो हम फिर वापस जाएंगे. वहीं दोहा में अमेरिकी
रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि अगर तालिबान अपने वादे से पीछे हटा तो
अमेरिका करार खत्म कर देगा.
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ऐतिहासिक हस्ताक्षर के बाद अमेरिका के
रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने शनिवार को कहा कि अगर तालिबान सुरक्षा गारंटी
से इनकार करता है और अफगानिस्तान की सरकार के साथ वार्ता की प्रतिबद्धता से
पीछे हटता है तो अमेरिका उसके साथ ऐतिहासिक समझौते को खत्म करने से पीछे
नहीं हटेगा.
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उधर समझौते के तहत अमेरिका 14 महीने के अंदर
अफगानिस्तान से अपने सैन्य बलों को निकाल लेगा. लगभग 30 देशों और
अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधि अमेरिका-तालिबान शांति
समझौते पर हस्ताक्षर के गवाह बने हैं.
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अफगानिस्तान और अमेरिका ने
संयुक्त रूप से घोषणा की है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य बलों की
संख्या घटाकर 8,600 की जाएगी. साथ ही अमेरिकी-तालिबान शांति समझौते में किए
गए वादों को 135 दिन में लागू किया जाएगा. हालांकि अमेरिका ने कहा कि वह
अफगानिस्तान की सरकार की सहमति से लगातार सैन्य ऑपरेशन चलाने को तैयार है.
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अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘हम इसकी करीब से निगरानी करेंगे कि तालिबान अपने वादों को लागू करता है या नहीं. इसके साथ ही हम अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य बलों को निकालने का फैसला लेंगे.
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अमेरिका-तालिबान शांति समझौते पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जालमे खलीलजाद
और तालिबान के कमांडर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने हस्ताक्षर किए. इस दौरान
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर भी मौजूद
रहे.
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अमेरिका ने 2001 में किया था अफगानिस्तान में हमला:
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सितंबर 2001 के आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में हमला किया था
और तालिबान सरकार को उखाड़ फेंका था. उस समय से तालिबान अफगानिस्तान की
सत्ता से बाहर है. करीब 18 साल तक चली जंग के बाद अमेरिका और तालिबान के
बीच शांति समझौता हुआ है.
इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका
ने साफ कहा कि तालिबान को अलकायदा और दूसरे आतंकी संगठनों से अपने रिश्ते
खत्म करने होंगे. तालिबान अफगानिस्तान की धरती को आतंकियों की पनाहगाह नहीं
बनने देगा.
समझौते के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद
कुरैशी भी मौजूद थे. पाकिस्तान ने अमेरिका-तालिबान शांति समझौते का स्वागत
किया है. वहीं, तालिबान ने अमेरिका के साथ हुए इस समझौते के लिए पााकिस्तान
का शुक्रिया अदा किया है.