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26/11 हमले का वो शहीद जिसका सर्वनाश चाहती थीं साध्वी प्रज्ञा

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 19 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST
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मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मुंबई हमले के शहीद हेमंत करकरे पर विवादित बयान दिया है. मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि हेमंत करकरे ने उन्हें गलत तरीके से फंसाया था. उन्होंने आपत्तिजनक बयान में कहा कि हेमंत करकरे अपने कर्मों की वजह से मरे हैं. सोशल मीडिया पर लोग 26/11 के हीरो हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा के बयान की आलोचना कर रहे हैं.

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जिस शहीद हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा ने विवादित बयान दिया, उसे अपनी बहादुरी और हौसले के लिए भारत सरकार द्वारा अशोक चक्र से सम्मानित किया जा चुका है.

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26/11 आतंकी हमले में शहीद तत्कालीन एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे का जन्म 12 दिसंबर 1954 को करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था. अपने परिवार में हेमंत तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा वर्धा के चितरंजन दास स्कूल में हुई थी.

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1982 बैच के आईपीएस अधिकारी करकरे नागपुर के विश्वेश्वरैया रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक थे. उन्होंने नैशनल प्रोडक्टिव काउंसिल और हिंदुस्तान लीवर जैसी कंपनियों की ऊंचे वेतन वाली नौकरी छोड़कर वर्दी पहनी थी. हिंदुस्तान लीवर ने तो करकरे को खो दिया लेकिन देश को अपना बहादुर अफसर मिल गया था. करकरे ने 1983 के बैच में अपने ट्रेनिंग के पहले वर्ष में ही टॉप किया था.

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1982 में वो आईपीएस अधिकारी बने थे. करकरे ऑस्ट्रिया में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) अधिकारी के रूप में सात साल तक तैनाती के बाद वह महाराष्ट्र कैडर में वापस लौटे. महाराष्ट्र के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के बाद उन्हें एटीएस चीफ बनाया गया था.

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1998 में करकरे ने शिवसेना नेता आनंद दीघे को ठाणे से गिरफ्तार करने का साहसिक कदम उठाया था. शिवसेना कल्याण के हाजी मलंग में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही थी. दीघे का ठाणे में वही कद था जो बाल ठाकरे का मुंबई में था.

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मालेगांव ब्लास्ट की जांच-
2006 में महाराष्ट्र के मालेगांव में शब-ए-बारात के दौरान दो ब्लास्ट हुए जिसमें 37 लोग मारे गए और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इनमें से अधिकतर मुस्लिम थे. 2007 से 2008 के दौरान समझौता एक्सप्रेस, हैदराबाद मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव में (2008) एक बार फिर इसी तरह के धमाके हुए.

ATS चीफ करकरे को मालेगांव ब्लास्ट 2008 मामले की जांच सौंपी गई. करकरे ने ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकल बरामद कर ली. यह साध्वी सिंह ठाकुर के नाम पर पंजीकृत थी. करकरे की जांच से पुलिस हिंदुत्व प्लॉट की तरफ आगे बढ़ी. जल्द ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट एसके पुरोहित को मुख्य आरोपी बनाया गया, उनकी गिरफ्तारी हुई और चार्जशीट दाखिल की गई. करकरे के नेतृत्व वाली एटीएस ने 4500 पेज की चार्जशीट में सारा विवरण दिया और हिंदुत्ववादी संगठन अभिनव भारत संघ को हमले के लिए जिम्मेदार बताया.

उनकी चार्जशीट को लेकर कई सवाल खड़े हुए. जांच के दौरान उन पर आरोपियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगा. उन पर यह भी आरोप लगा कि साध्वी प्रज्ञा सहित तमाम आरोपियों को एक साजिश के तहत फंसाया गया.

2011 में इस मामले की जांच एटीएस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी. मगर 2016 में जब एनआईए ने अपनी पहली फाइनल चार्जशीट कोर्ट में दायर की तो उसमें साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दे दी थी.

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मुंबई हमले के हीरो-
26 नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमला हुआ. हेमंत करकरे दादर स्थित अपने घर पर थे. वह फौरन अपने दस्ते के साथ मौके पर पहुंचे. उसी समय उनको खबर मिली कि कॉर्पोरेशन बैंक के एटीएम के पास आतंकी एक लाल रंग की कार के पीछे छिपे हुए हैं. वहां तुरंत पहुंचे तो आतंकी फायरिंग करने लगे.

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इसी दौरान एक गोली एक आतंकी के कंधे पर लगी. वो घायल हो गया. उसके हाथ से एके-47 गिर गया. वह आतंकी अजमल कसाब था. इसी दौरान आतंकियों की ओर से जवाबी फायरिंग में तीन गोली इस बहादुर जवान को भी लगी, जिसके बाद वह शहीद हो गए.

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26 नवंबर 2009 में इस शहीद की शहादत को सलाम करते हुए भारत सरकार ने मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया था.

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