जानें, तुलसी पूजा से जुड़ी पौराणिक मान्यता और महत्ता

तुलसी पूजन से महावरदान पाया जा सकता है लेकिन इसके लिए विशेष पूजा-अर्चना करनी होगी. जिस घर में तुलसी के पौधे की रोज पूजा होती है उस घर पर श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा होती है. मान्यता ये भी है कि कार्तिक मास में श्रीहरि ने शालिग्राम रूप लेकर तुलसी से विवाह किया था. तभी से कार्तिक और तुलसी का विशेष संबंध है. आइए जानते हैं कि तुलसी का पौराणिक इतिहास क्या है और तुलसी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण...

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तुलसी पूजा का महत्व तुलसी पूजा का महत्व

प्रज्ञा बाजपेयी

  • नई दिल्ली,
  • 31 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 4:55 PM IST

तुलसी पूजन से महावरदान पाया जा सकता है लेकिन इसके लिए विशेष पूजा-अर्चना करनी होगी. जिस घर में तुलसी के पौधे की रोज पूजा होती है उस घर पर श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा होती है. मान्यता ये भी है कि कार्तिक मास में श्रीहरि ने शालिग्राम रूप लेकर तुलसी से विवाह किया था. तभी से कार्तिक और तुलसी का विशेष संबंध है. आइए जानते हैं कि तुलसी का पौराणिक इतिहास क्या है और तुलसी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण...

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क्या है तुलसी का महत्व ?

- सनातन परंपरा में जड़ और चेतन सभी में ईश्वर का भाव रखते हैं.

- नदियां, पहाड़, पत्थर और पेड़-पौधों में भी ईश्वर का वास माना जाता है.

- पौधों में नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने कि क्षमता होती है.

-इसलिए पौधों में देवी-देवताओं का वास माना जाता है.

- तुलसी का पौधा भी ऐसा ही एक पौधा है.

-तुलसी में औषधीय और दैवीय दोनों गुण पाए जाते हैं.

- पुराणों में तुलसी को भगवान विष्णु की पत्नी कहा गया है.

- मान्यता है कि श्रीहरि ने छल से तुलसी का वरण किया था.

-इसलिए श्रीहरि को पत्थर हो जाने का शाप मिला और श्रीहरि ने शालिग्राम रूप लिया.

- शालिग्राम रूपी भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के नहीं हो सकती.

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