मैरी कॉम के जीवन की कुछ झलकियां

भारत की चहेती बॉक्सर मैरी कॉम के बारे में कुछ ऐसी बातें जिनसे वाकिफ नहीं हैं. पांच बार की विश्व चैंपियनशिप विजेता ने हाल ही में अपनी आत्मकथा अनब्रेकेबल जारी की है.

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सुहानी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 24 दिसंबर 2013,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

लहू का रंग बॉक्सिंग के जींस जवानी के दिनों में गांव के चैंपियन पिता मांगटे टोन-पा कॉम से विरासत में मिले.

हमसफर ओलेर कॉम उनके हमसफर हैं, यह बात वे 2000 में तभी जान गई थीं जब उनका पासपोर्ट खो गया था और वे उनके बचाव के लिए आए.

जबरदस्त पंच बॉक्सिंग जैब, क्रॉस, हुक और अपरकट से बढ़कर भी कुछ है. मैरी अपने मुक्कों में 'फूम’ की आवाज भी सुनना चाहती हैं. उनके अनुसार, यह ताकत की आवाज होती है.

मसल मॉम ''मेरे बच्चे मेरी मसल्स से बहुत खुश रहते हैं,” मैरी मजाकिया लहजे में कहती हैं. ''और चूंकि मेरे पास डैडी से ज्यादा मसल्स हैं, वे मेरी तरफदारी करते हैं.”

घर जैसा टी-शर्ट और मणिपुरी रैप अराउंड स्कर्ट में सबसे ज्यादा आराम महसूस करती हैं.

झुंझलाहट जब पूर्वोत्तर के लोगों पर सड़क चलते लोग अपमानजनक फब्तियां कसते हैं.

यादगार लम्हा 17 साल की उम्र में अपने साथ छेड़छाड़ की कोशिश करते एक रिक्शेवाले को जब उन्होंने एक मुक्का जड़कर लहूलुहान कर दिया था. 

जमा-पूंजी  हमारे क्रिकेट सितारों के बिल्कुल उलट, 10 साल के शानदार करियर के बाद भी उनके पास 1 करोड़ रु. भी नहीं हैं.

गौरव के पल
सम्मानजनक बुलावा

आमिर खान की पीपली लाइव के बाद एक और भारतीय फिल्म सनडांस फिल्म फेस्टिवल में जाने वाली है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी तथा मलयाली अभिनेता गीतू मोहनदास निर्देशित पहली फिल्म लायर्स डाइस वर्ल्ड सिनेमा ड्रैमेटिक कांपिटीशन का हिस्सा है.


आंकड़ों की जुबानी 61 वर्ष
बुढ़ापे में मैराथन जीतने की ललक. महाराष्ट्र के पिपली की प्रवासी मजदूर लता भगवान कारे नौ मीटर साड़ी में 3 किलोमीटर दौड़ीं

हम काम करते हैं और हंगामा भी
रानी मुखर्जी ने अपनी फिल्म मरदानी के लिए जबरदस्त तैयारियां शुरू कर दी हैं. उन्होंने मुंबई के जॉइंट पुलिस कमिश्नर हिमांशु रॉय से घंटे भर तक बात की ताकि वे सुपरकॉप के दिमाग को समझ सकें.

मौका दुआओं और मूड बदलने के इंतजार का है. फिल्ममेकर अकबर खान के हाथ में अब यही बचा है. उनकी अपील है कि पूरी कायनात हृतिक और सुजैन को मिलाने की जुगत करे.

फर्स्ट लुक
मौलवी पिता और उसके बेटे की कहानी दोजख को एशियन फिल्म फेस्टिल में दिखाया जाएगा. डायरेक्टर जैगम इमाम की फिल्म में 12 साल के मुस्लिम बच्चे के रामलीला में हनुमान बनने और उसके पिता के बीच तकरार की बड़ी ही मार्मिक कहानी है.
— संकलन: सुहानी सिंह


वर्ष: 28; अंक: 8; 26 दिसंबर, 2013-1 जनवरी, 2014;  प्रत्येक शनिवार को प्रकाशित, कुल पेज: 68 (कवर सहित)

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