संसद में नेट न्यूट्रैलिटी, राहुल गांधी बोले- उद्योगपतियों को नेट देना चाहती है सरकार

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में नेट न्यूट्रैलिटी का मुद्दा उठाया. उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इंटरनेट को भी कॉरपोरेट घरानों के हाथों बेच रही है जबकि यह पूरे देश के युवाओं का अधिकार है.

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की फाइल फोटो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की फाइल फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2015,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में नेट न्यूट्रैलिटी का मुद्दा उठाया. उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इंटरनेट को भी कॉरपोरेट घरानों के हाथों बेच रही है जबकि यह पूरे देश के युवाओं का अधिकार है. ...तो खत्म हो जाएगा 'मेक इन इंडिया' अभियान

राहुल गांधी ने कहा, 'रोजगार और भोजन के अधिकार की बात होती है. वैसे ही नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है हर युवा को नेट का अधिकार होना. मोदी सरकार इंटरनेट को भी बड़े-बड़े उद्योगपतियों को बांटना चाहती है. करीब एक मिलियन लोगों ने इसके खिलाफ अपील की है. मेरी सरकार से अपील है कि नेट न्यूट्रलिटी के लिए या तो कानून में बदलाव करें या फिर कानून में संशोधन करें.' नेट न्यूट्रलिटी को मिल सकता है समर्थन!

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राहुल गांधी के इस प्रस्ताव पर सरकार ने सदन में सफाई दी. सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार नेट न्यूट्रलिटी को लेकर गंभीर है और देश में नेट का भविष्य सुरक्षित है.

हमारी सरकार कॉरपोरेट के दबाव में नहीं: रविशंकर प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'इस विवाद की शुरुआत से पहले ही हमारी सरकार ने कहा है कि हम युवाओं के एक्टिविजम को सराहते हैं. मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया की शुरुआत की. हम देश हर नागरिक को नेट से जोड़ना चाहते हैं. मुद्दा ज्ञात होने के बाद मेरे मंत्रालय ने जनवरी 2015 में कमिटी बनाई थी. यह समिति मई के दूसरे हफ्ते में रिपोर्ट देगी. ट्राई को सर्वे करने का अधिकार है, पर फैसला रविशंकर प्रसाद और नरेंद्र मोदी की सरकार को करना है. मैं आश्वस्त कर दूं कि हमारी सरकार 125 करोड़ जनता तक नेट को पहुंचाना चाहती है. और सबसे अहम बात यह कि हमारी सरकार न किसी कॉरपोरेट के दबाव में आती है, न ही आएगी.'

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