येरूशलम को इस्राइल की राजधानी घोषित करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से कई जगहों पर हिंसा भड़क गई है. इस बीच फलस्तीनी प्रदर्शनकारियों और इस्राइली सुरक्षा बलों के बीच शुक्रवार को झड़प हो गई जिसमें एक फलस्तीनी मारा गया. ट्रंप के फैसले के खिलाफ फलस्तीनियों की ओर से ‘आक्रोश दिवस’ मनाया गया. अरब देशों के साथ-साथ भारत में भी इसका विरोध शुरू हो गया है. शुक्रवार को कश्मीर में कई जगहों पर ट्रंप के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया गया.
अधिकारियों ने बताया कि जुमे की नमाज के बाद शहर के मैसूमा, छत्ताबल, हसनाबाद और अबीगुजर इलाकों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए. उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए तथा येरूशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के ट्रंप के फैसले की निंदा की. कश्मीर के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से से भी प्रदर्शन की रिपोर्टें मिली हैं. गुरेज़ में अमेरिका विरोधी रैली निकाली गई.
अधिकारियों ने अलगाववादियों द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन के मद्देनजर कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रीनगर के हिस्सों में पाबंदी लागू कर दी थी. नौहट्टा थाने के तहत आने वाले पुराने शहर की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज नहीं हुई. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी धडे के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को कल शाम नजरबंद कर दिया गया था. वह जामिया मस्जिद में जुमे का खुतबा देते हैं.
गुरुवार को ही गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक के पास कई फिलीस्तीन प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और ट्रंप के पोस्टर भी जलाए. गाजा का प्रशासन चला रहे उग्रवादी संगठन हमास के नेता ने बड़े पैमाने पर गुस्से का इजहार करने के लिए नए सैन्य आंदोलन का आह्वान किया. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और इजरायली झंडे भी जलाए. बेथलहम में जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार की और आंसू गैस के गोले छोड़े गए.
तेल अवीव स्थित अमेरिकी एंबेसी को येरूशलम ले जाने की अमेरिकी घोषणा के बाद अलकायदा और इस्लामिक स्टेट ने अमेरिका पर हमले की धमकी दी है. आशंका इस बात है कि ट्रंप की घोषणा के बाद इस्लामिक चरमपंथियों और जेहादियों को दुनिया भर में अभियान छेड़ने का मौका मिल जाएगा. ऐसे में अलकायदा और आईएस की धमकी इस आशंका को बल देती है.
राहुल विश्वकर्मा