शीर्ष नौकरशाह-परदे के पीछे के बड़े खिलाड़ी

मिश्र ने दिल्ली के कुख्यात ट्रांसफर-पोस्टिंग राज को ध्वस्त कर दिया है. उन्होंने नौकरशाहों की ईमानदारी, दक्षता और योग्यता को ध्यान में रखते हुए चयन की एक नई प्रणाली विकसित की है.

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पी.के. मिश्र पी.के. मिश्र

संध्या द्विवेदी

  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 8:10 PM IST

 पीएमओ में अतिरिक्त प्रधान सचिव 71 वर्षीय पी.के. मिश्र नौकरशाहों की सूची में तीसरे नंबर पर हैं.

क्योंकि वे प्रधानमंत्री मोदी के सबसे भरोसेमंद नौकरशाहों में से एक हैं. मोदी 2001 में जब पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब मिश्र गुजरात के प्रमुख सचिव थे. मिश्र नौकरशाहों की नियुक्तियों के साथ-साथ सशस्त्र बलों, सुरक्षा एजेंसियों और न्यायपालिका की नियुक्ति से जुड़े कामकाज भी देखते हैं

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क्योंकि मिश्र ने दिल्ली के कुख्यात ट्रांसफर-पोस्टिंग राज को ध्वस्त कर दिया है. उन्होंने नौकरशाहों की ईमानदारी, दक्षता और योग्यता को ध्यान में रखते हुए चयन की एक नई प्रणाली विकसित की है

क्योंकि वे ससेक्स विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट हैं और यह ज्ञान नीति निर्माण से जुड़ी बैठकों में बड़े काम आता है

सेवाभाव से ओत-प्रोत

मिश्र को आपदा जोखिम कम से कम करने के लिए 2019 का संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय ससाकावा पुरस्कार मिला.

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