नवंबर के पहले हफ्ते में ही 1600 ट्रेनें लेट, 90 को किया गया कैंसिल

1 नवंबर से 13 नवंबर के बीच 1600 रेलगाड़ियां लेट रही हैं। नई दिल्ली पहुंचने वाली तमाम ट्रेनें 6 घंटे से लेकर 21 घंटे की देरी से चल रही हैं। वहीं, 7 नवंबर से कोहरा घना होने के चलते रेलवे ने अब तक 90 रेलगाड़ियों को कैंसिल किया है।

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प्रतिकात्मक तस्वीर प्रतिकात्मक तस्वीर

सिद्धार्थ तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:39 AM IST

नवंबर के पहले हफ्ते में ही कोहरे की वजह से रेलगाड़ि‍यों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है. रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक कोहरे की वजह से रेलगाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है. 1 नवंबर से 13 नवंबर के बीच 1600 रेलगाड़ियां लेट रही हैं. नई दिल्ली पहुंचने वाली तमाम ट्रेनें 6 घंटे से लेकर 21 घंटे की देरी से चल रही हैं. वहीं, 7 नवंबर से कोहरा घना होने के चलते रेलवे ने अब तक 90 रेलगाड़ियों को कैंसिल किया है.

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ट्रेनों में लगाए जा रहे  GPS डिवाइस

बता दें, इस बार रेल मंत्रालय कोहरे को लेकर खास योजना बना रहा है। दावा है कि कोहरे से निपटने के लिए GPS इनेबल्ड डिवाइस को उत्तर भारत की ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, उत्तर भारत में चलने वाली ट्रेनों में 2400 डिवाइसेज लगाई भी जा चुकी हैं. बहरहाल ट्रेनों में डिवाइस लगाने के दावे चाहें जो भी हों फिलहाल ट्रेनें लेट हो रही हैं. 

कोहरे से निपटने के लिए त्रिनेत्र डिवाइस का ट्रायल हुआ

कोहरे की मार से रेलवे हमेशा से परेशान रहा है. मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इसके निदान के लिए त्रिनेत्र डिवाइस को ट्रेन में लगाने की योजना बनाई गई. इसका ट्रायल भी शुरू किया गया, लेकिन दो सीजन खत्म हो जाने के बाद भी इसे लेकर ठोस फैसला नहीं लिया गया है. रेलवे बोर्ड के अधिकारियों का कहना है त्रिनेत्र को लेकर अलग-अलग कंपनियों के प्रोडक्ट को जांचा जा चुका है, जल्द ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा.

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रेल मंत्रालय सेफ्टी मानकों पर कर रहा काम

इससे पहले अक्टूबर में जब रेल मंत्री पीयूष गोयल से ट्रेनों की लेटलतीफी के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा था- हमारी ओर से निर्देश दिए गए हैं, भले ही ट्रेन लेट हो जाए लेकिन लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जाए. रेल मंत्री ने यह बात ऐसे समय में कहीं थी जब कई रेल दुर्घटनाओं से रेल मंत्रालय परेशान था.

बार-बार डिरेल होती ट्रेनों को लेकर रेल मंत्रालय ने सेफ्टी के काम को तरजीह दी है. रेल मंत्रालय ने सभी समपार फाटकों को 2018 तक खत्म करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे में कई जगह पर सिग्नलिंग और एफओबी के काम चल रहे हैं. कई जगहों पर पुरानी पटरियों को बदलने का भी निर्देश दिया गया है. लिहाजा इन सब का असर रेल गाड़ियों की आवाजाही पर पड़ रहा है.

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