निर्भया केस में एक दोषी मुकेश ने पटियाला हाउस कोर्ट से फांसी रद्द करने की मांग की है. मुकेश ने अपनी याचिका में कहा कि 17 दिसंबर 2012 को उसे दिल्ली पुलिस राजस्थान से लाई थी, लिहाजा वो 16 दिसंबर को दिल्ली में नहीं था. वकील एमएल शर्मा ने दोषी मुकेश की तरफ से याचिका लगाई है. एमएल शर्मा ने कोर्ट में दावा किया कि उसे एक शख्स ने बताया कि मुकेश को जेल में प्रताड़ित किया जाता था. सरकारी वकील इरफ़ान ने कहा कि ये दोषी की तरफ से फांसी को टालने की कोशिश है. फांसी को अब सिर्फ दो/तीन दिन बचे हैं, तब इस तरीके की याचिका लगाई जा रही है. पहले कभी ये बात नहीं रखी गई.
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एविडेंस एक्ट का हवाला देते हुए शर्मा ने कहा कि पुलिस ने तथ्य छिपाए हैं जबकि मुकेश को राजस्थान के करोली से गिरफ्तार किया गया था. वकील ने कहा, इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने कहा कि हमने मुकेश को राजस्थान से नहीं, रविदास कैंप, आरके पुरम से गिरफ्तार किया था. दिल्ली पुलिस ने मुकेश को लाने के दस्तावेज नहीं लगाए. घटना 16 दिसंबर 2012 की है और मुकेश को राजस्थान से 17 दिसंबर को गिरफ्तार किया ऐसा कैसे संभव है?
दिल्ली पुलिस ने तथ्यों को छिपाया और तोड़-मरोड़कर पेश किया है, दोषी बरी किया जाना चाहिए. वकील ने कहा, भले ही हमारी सभी लीगल रैमेडी खत्म हो चुकी है, लेकिन ये तथ्य महत्वपूर्ण है. मुकेश के बयान में था कि उसे रविदास कैंप से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सिपाही ने कहा था कि हम मुकेश को राजस्थान के करोली से लेकर आए थे.
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सरकारी वकील इरफान ने कहा कि अगर दोषी की तरफ से ये बात दिल्ली हाईकोर्ट के सामने रखी गई और दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं माना तो फ्रॉड का तो कोई मामला ही नहीं बनता. दिल्ली सरकार के वकील राजीव मोहन ने भी कहा कि ये फांसी की तारीख को आगे टालने की कोशिश है. मुकेश के वकील एम एल शर्मा ने कहा कि मुकेश का सीआरपीसी की धारा 313 में लिया गया बयान दबाव और टॉर्चर करके लिया गया था, जिसमें उसने स्वीकार किया था कि उसे रविदास कैंप, आरके पुरम दिल्ली से गिरफ्तार किया था. जबकि ट्रायल के दौरान गवाह संख्या 58 सब इंस्पेक्टर अरविंद ने बयान दिया था कि मुकेश को राजस्थान के करोली से गिरफ्तार किया गया था.
पूनम शर्मा