कोरोना संकट के दौरान तमाम राज्यों में फंसे मजदूरों का सब्र टूट रहा है तो वहीं राजनीतिक पार्टियां इस पर सियासत कर रही हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मजदूरों से ट्रेन का किराया वसूला जा रहा है. सरकार ने इसे झूठ बताया. सफाई दी कि खर्च का 85 फीसदी हिस्सा केंद्र और 15 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारें उठा रही हैं. अलग अलग शहरों से मजदूरों को ट्रेन से घर भेजा जा रहा है. ऐसे वक्त में मजदूरों से ट्रेन का किराया भी लिया जा रहा है.
मजदूरों की घरवापसी पर अब सियासी तरकार भी तेज हो गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं कि मजदूरों से सरकार किराया वसूल रही है, मगर सरकार की ओर से पलटवार कहते हुए कहा गया है कि सरकार मजदूरों से कोई किराया नहीं ले रही है. हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी बयान दिया कि राज्यों की कांग्रेस कमेटी मजदूरों के किराए का बंदोबस्त करे मगर सच्चाई यही है कि मजदूरों को न सरकार से मदद मिली और न ही किसी पार्टी से. उन्हें टिकट का पूरा पैसा चुका कर घरवापसी करनी पड़ी है.
इसी क्रम में सोमवार को हजारों की तादाद में मजदूर गुजरात के वडोदरा से लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे. इन्हें स्पेशल श्रमिक ट्रेन से लाया गया. ट्रेन में सवार लोगों से पूछने पर पता चला कि उन्होंने टिकट का पूरा पैसा चुकाया है. इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से बयान दिया गया कि मजदूरों के किराये का इंतजाम किया गया है. बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि किराये का 85 फीसद हिस्सा केंद्र चुका रहा है जबकि 15 फीसद राज्यों को देना है. दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्यों की कांग्रेस समितियों से कहा कि मजदूरों के किराये का बंदोबस्त किया जाए.
उधर सोमवार शाम लखनऊ पहुंचे मजदूरों ने बताया कि उन्होंने टिकट का पैसा खुद चुकाया. चारबाग पहुंचे एक मजदूर ओमप्रकाश ने आजतक से कहा, मैं वडोदरा से आ रहा हूं. मैं दिसंबर में काम करने के लिए गया था. जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो उसके दो-तीन दिन बाद हम लोग वहां से चल दिए थे. वहां खाने-पीने की दिक्कत थी, लेकिन पुलिसवालों ने पकड़ लिया और क्वारनटीन के लिए भेज दिया. वहां पर हम लोगों की जांच भी हुई. हम लोगों को 35 दिन रखा गया था. हम लोगों ने टिकट (लखनऊ आने का) भी लिया है 555 रुपए का. हम अमेठी जा रहे हैं.
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इसी तरह एक और श्रमिक श्याम सुंदर ने कहा, मैं वडोदरा से आ रहा हूं. मैं वहां पर फेब्रिकेशन का काम करता था. मैं दो-तीन महीने पहले वहां गया था. जब लॉकडाउन हुआ तो हम लोग वहां से चल दिए, लेकिन पुलिस ने पकड़ लिया और एक स्कूल में रख दिया. अब छुट्टी मिली है तो हम लोग वहीं से आ रहे हैं. हम लोगों ने टिकट भी लिया है जिसका मूल्य 500 रुपये है. मैं मछली शहर जा रहा हूं. एक और श्रमिक तिलक धारी ने आजतक से कहा, मैं वडोदरा से आ रहा हूं जहां फेब्रिकेशन का काम करता था. हम ट्रेन से आ रहे हैं. ट्रेन में एक बार खाने-पीने को मिला था. मैंने 500 रुपये का टिकट लिया है. मैं जौनपुर जा रहा हूं.
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बता दें, जब तक मजदूर घर नहीं जा पा रहे थे, तब तक उन्हें घर पहुंचाने को लेकर सियासत हो रही थी और अब जब वे रेल से घर पहुंचने लगे हैं, तो राजनीति में नया संग्राम मच गया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कोरोना के ऐसे मुश्किल वक्त में भी सरकार मजदूरों से किराया वसूल रही है, जिन मजदूरों के पास खाने का सामान नहीं है, वो किराए का पैसा कहां से लाएंगे.
कांग्रेस ने कहा, विदेश से लोगों को अगर मुफ्त में लाया जा सकता है तो देश के लोगों को मुफ्त में क्यों नहीं भेजा जा सकता. इस बारे में खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बयान दिया. विपक्ष के आरोप संगीन थे और सरकार पर सवाल गहरे, लिहाजा सरकार की ओर से स्थिति को साफ किया गया. सरकार ने कहा, मजदूरों से टिकट का पैसा नहीं लिया जा रहा है, टिकट का 85 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठा रही है. टिकट का 15 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार के हिस्से है.
सरकार के अलावा रेलवे ने भी साफ किया कि किसी भी स्टेशन पर टिकट नहीं बेचे जा रहे हैं. टिकट उन्हीं को दिए जा रहे हैं जिन्हें राज्य सरकार भेज रही है. यानी विपक्ष के आरोपों को सरकार की ओर से बेदम कर दिया गया. उधर बिहार के मुख्यमंत्री ने भी बताया कि मजदूरों की घर वापसी के लिए मजदूरों से टिकट का पैसा नहीं लिया जा रहा, बल्कि सरकार खुद पैसा खर्च कर रही है, लेकिन महाराष्ट्र से जो खबर आई, उसने परेशान किया. महाराष्ट्र के नागपुर से लखनऊ लौटे मजदूरों ने टिकट दिखाया और बताया कि उनसे टिकट का पैसा लिया गया.
सत्यम मिश्रा / कुमार अभिषेक