चिदंबरम को राहत, परिवार के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी से जुड़ा आदेश रद्द

मद्रास हाईकोर्ट ने चिदंबरम के  परिवार के सदस्यों के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी देने संबंधी आईटी का आदेश रद्द करते हुए कहा कि उनके खिलाफ इस संबंध में कोई मामला नहीं बनता.

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पी चिदंबरम (तस्वीर- पीटीआई) पी चिदंबरम (तस्वीर- पीटीआई)

दीपक कुमार

  • चेन्नई,
  • 02 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 11:37 PM IST

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को राहत देते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की मंजूरी देने संबंधी आयकर (आईटी) विभाग का आदेश रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ इस संबंध में कोई मामला नहीं बनता. यह मामला चिदंबरम की पत्नी नलिनी, उनके पुत्र कार्ति और बहू श्रीनिधि के विदेशी संपत्ति और बैंक खातों के बारे में जानकारी कथित तौर पर गोपनीय रखने से जुड़ा है.

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आयकर विभाग के अनुसार तीनों ने आयकर रिटर्न में ब्रिटेन के कैम्ब्रिज में 5.37 करोड़ रुपए की अपनी संयुक्त संपत्ति का खुलासा नहीं किया था जो काला धन (अघोषित विदेशी आय - संपत्ति) और टैक्स धोखाधड़ी अधिनियम के तहत एक अपराध है.

याचिका जब जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस सुब्रमणिया प्रसाद की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई तो पीठ ने कहा कि इस संबंध में कोई मामला नहीं बनता और आपराधिक मुकदमा रद्द किया जाता है. चिदंबरम के परिवार के खिलाफ आईटी विभाग द्वारा शुरू किए गए आपराधिक मुकदमे को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की गई थी.

हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान विदेशी संपत्ति को ‘गोपनीय’ रखने के मामले में चिदंबरम के परिवार को विशेष अदालत में पेशी से छूट वाले अंतरिम आदेश की अवधि शुक्रवार तक बढ़ा दी थी. विभाग ने यह भी आरोप लगाया कि कार्ति चिदंबरम ने ब्रिटेन के मेट्रो बैंक में अपने विदेशी बैंक खातों और अमेरिका में नैनो होल्डिंग्स एलएलसी में निवेश का खुलासा नहीं किया.

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हाईकोर्ट ने राहत देने से कर दिया था इनकार

विशेष अदालत में मई में दायर अपनी शिकायत में विभाग ने यह भी कहा था कि कार्ति ने अपने सह-स्वामित्व वाली कंपनी चेस ग्लोबल एडवाजरी में निवेशों का भी खुलासा नहीं किया जो काला धन अधिनियम (ब्लैक मनी एक्ट) के तहत एक अपराध है.

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