लोकसभा में नवनिर्वाचित स्पीकर ओम बिड़ला अब तक सुचारू ढंग से सदन को चलाने में सफल रहे हैं. चर्चा के दौरान गतिरोध पैदा करने वाले सांसदों को स्पीकर ने फटकार भी लगाई और नए सांसदों को ज्यादा से ज्यादा मौके देने की कोशिश भी की. इस कड़ी में मंगलवार को स्पीकर ने केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को चर्चा के दौरान नसीहत दे डाली और आसन के अधिकार भी उनके याद करा दिए.
सदन में मंगलवार को केंद्रीय शैक्षणिक संस्था (शिक्षकों के काडर में आरक्षण) विधेयक 2019 पर चर्चा हुई और इस बिल को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. लेकिन जब मंत्री रमेश पोखरियाल चर्चा का जवाब दे रहे थे तभी एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने बिल से जुड़े किसी बिन्दु को सदन में उठाने की इच्छा जताई और इसके लिए उन्होंने अपना हाथ ऊपर किया. इस पर मंत्री ने अपना भाषण रोक उन्हें बोलने की इजाजत देते हुए कहा कि आप कुछ कह रही थीं. बस इतना होते ही स्पीकर ओम बिड़ला ने मंत्री को सदन के नियमों का पाठ पढ़ा दिया.
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सुप्रिया सुले ने पहले मंत्री से अपनी बात कही, इसके बाद जैसे ही रमेश पोखरियाल ने फिर से बोलना शुरू किया तो स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि मंत्रीजी आप आज्ञा न दिया करें कि आप बोलें, सदन में आज्ञा देने का काम मेरा है. स्पीकर के इतना कहते ही सदन में जोर से ठहाके लगने लगे. इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बिल पर चर्चा को आगे बढ़ाया.
स्पीकर ओम बिड़ला सत्ता पक्ष हो या विपक्ष किसी भी ओर से हंगामा करने वाले सांसद को फटकार लगाने से नहीं चूकते. बीते दिनों उन्होंने एक सांसद को बैठे-बैठे बोलने पर फटकार लगाते हुए कहा था कि आप यहां बैठकर ज्ञान नहीं दे, सदन नियमों से चलेगा, पहले कैसे भी होता आया हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. राजस्थान के कोटा से दूसरी बार चुने गए ओम बिड़ला को 17वीं लोकसभा में स्पीकर बनाया गया है. कम अनुभवी होने के बावजूद बिड़ला सदन को नियमों के मुताबिक और कठोरता से चलाने में अबतक सफल रहे हैं. पीएम मोदी ने ओम बिड़ला के नरम दिल बताते हुए उनकी तारीफ की थी और कहा था कि डर है कि कोई सदन में उनकी विनम्रता का गलता फायदा न उठाए.
अनुग्रह मिश्र