अब तक सभी लोग यह जान चुके हैं कि कोलावरी कैसे अस्तित्व में आया. फिल्म 3 की निर्देशक ऐश्वर्या रजनीकांत, संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर, फिल्म की मेरी सह-कलाकार (और गायिका) श्रुति हासन और खुद मैं एक अनौपचारिक और बहुत थका देने वाले सत्र से गुजर रहे थे. ऐश्वर्या फिल्म की उस सिचुएशन के लिए एक गीत चाहती थी जिसमें एक लड़की, लड़के को छोड़कर चली जाती है और वह लड़का नशे में होकर गाना गाता है.
04 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
अनिरुद्ध ने 20 मिनट में धुन तैयार कर दी और मैं माइक के पीछे जाकर सिचुएशन के हिसाब से जो भी पहले शब्द मेरे दिमाग में आए, गाने लगा. शुरुआत में मैंने गीत के गंभीर बोल तैयार किए थे मगर ऐश्वर्या कुछ मजेदार चाहती थी. जब मैंने व्हाय दिस कोलावरी डी? गाया, तो अनिरुद्ध ने कहा, ''बिल्कुल ठीक भाई, बाकी के बोल भी इसी तरह के रखो.'' आगे बढ़ते हुए मैं बाकी का गीत बनाता गया, और इसमें लगभग 6 मिनट लगे होंगे. आज भी मेरे पास लिखित रूप में इस गीत की कोई प्रति मौजूद नहीं है.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
जब मैं कइला ग्लास कहते हुए गलती से तमिल बोल गया तो संगीतकार ने मुझे अंग्रेजी में ही गाते रहने के लिए कहा और हमने गाने में इसे जस का तस रहने दिया. अब चूंकि गाना इतना लोकप्रिय हो गया है तो बहुत से लोग हैरान हैं कि 'सूप सांग' का क्या मतलब होता है? मैंने इसे अंग्रेजी के मुहावरे 'टु बी इन अ सूप' से निकाला है; इस तरह 'सूप सांग' अलगाव से पैदा होने वाला गीत है. उसी तरह 'सूप बॉय' वह लड़का होता है जिसे छोड़ दिया गया हो.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
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लोग मुझे बताते रहते हैं कि वीडियो एकदम स्वाभाविक लगता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हम सभी बस अटके हुए थे. हम सभी नई पीढ़ी के बच्चे हैं, हमारे बीच अहम आड़े नहीं आता और हम एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं.
मेरा मानना है कि गीत के बोल लोगों की समझ में आ जाते हैं. मुझे लगता है कि यह हमारी ईमानदारी की सफलता है, हम ऐसा कुछ होने का बहाना नहीं कर रहे थे जो हम नहीं हैं. अंग्रेजी मेरी पहली भाषा नहीं है. मेरे जैसे बहुत से लोग हैं जो बहुत अच्छी अंग्रेजी नहीं बोल पाते. इस गीत ने निश्चित रूप से उनके साथ तादात्म्य स्थापित किया है. लेकिन फिर, गाने ने मूल अंग्रेजीभाषी लोगों के साथ भी तादात्म्य स्थापित किया है जो इस बात को साबित करता है कि एक गाने के आधार पर कोई सिद्धांत प्रतिपादित करना नामुमकिन है.
30 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
भविष्य में लिखे जाने वाले गीतों के लिए इस गीत की सफलता का क्या मतलब है? कुछ भी नहीं. सामान्य गीत लिखे जाते रहेंगे. यह गाना लोगों को इसी तरह के बोल वाले गीत लिखने के लिए प्रेरित कर सकता है.
मगर इस गाने ने एक बात साबित की है. पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चाहे जो हो, देश हो या पूरी दुनिया, यह सब हमारी पहुंच के भीतर है. यदि आप ठीक से कोशिश करें तो आप वहां पहुंच सकते हैं. कोई भी चीज बहुत दूर नहीं होती. दुनिया बहुत छोटी है. अब मुझे यकीन हो गया है कि तमिल गाने, तमिल सिनेमा और तमिल जनता की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहुंच हो सकती है यदि हम ठीक से कोशिश करें और एक-दूसरे का सहयोग करें.
23 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे16 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
अगर कोई चीज लोकप्रिय हो जाए तो यह स्वाभाविक है कि लोग उसकी चीड़-फाड़ शुरू कर दें और हर अच्छी चीज के पास लड़ने के लिए खुद के प्रेत होते हैं. एक बार जब मैं जान गया कि इस गीत का संक्रमण फैलता ही जा रहा है तो मैं यह भी जान गया कि लोग बैठेंगे, इस पर बहस करेंगे और आखिरकार इस गाने की चीड़-फाड़ शुरू कर देंगे.
वे लोग जिन्होंने इस गाने का गलत अर्थ लगाया है कि यह गाना स्त्री-विरोधी है, उन लोगों को यह साफ-साफ समझने की जरूरत है कि मैं सभी स्त्रियों के बारे में नहीं लिख रहा हूं. न तो मैं सभी प्रेम करने वाले लोगों की ओर से लिख रहा हूं. न ही गाने का निशाना कोई खास लड़की ही है. गाना फिल्म की एक सिचुएशन के हिसाब से लिखा गया था. मौके की मांग इसी तरह की पंक्तियों की थी, और चलिए मान लेते हैं, हम किसे बेवकूफ बना रहे हैं? हम पैसा कमाने के लिए इस उद्योग में हैं. गाने को चलना भी चाहिए.
कृपया गाने के बोल की आलोचना न करें, और कृपया गाने को इतना महत्व भी न दें. यह गाना देश प्रेम के बारे में नहीं है; यह गाना मां के लिए प्रेम के बारे में नहीं है; और यह गाना बच्चों को बचाने के बारे में भी नहीं है. अपना कीमती समय इस गाने के विश्लेषण में बर्बाद न करें. मेरा कुछ ऐसे कवियों से भी सामना हुआ है जो इस गाने से आहत हुए हैं. मैं एक मनोरंजन करने वाला हूं और यह मेरा कर्तव्य है कि मैं अपने रास्ते में आने वाली सभी चीजों को संदेह की नजर से देखूं. आपकी तारीफें सर आंखों पर और आपकी आलोचनाएं भी सर आंखों पर. मैं सभी के दृष्टिकोण को स्वीकार करता हूं और सभी के विचारों का सम्मान करता हूं.
धनुष तमिल अभिनेता हैं. लेख शिल्पा रत्नम के साथ बातचीत पर आधारित.
धनुष