कश्मीर में पर्यटन उद्योग को लॉकडाउन के चलते भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. कश्मीर में आबादी का 15 फीसद हिस्सा पर्यटन से जुड़ा हुआ है और लॉकडाउन के चलते पूरा उद्योग ठप पड़ा हुआ है. दरअसल जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त से ही पर्यटन उद्योग ठप है, जब से अनुच्छेद 370 हटाने के साथ कश्मीर में कई महीनों तक पाबंदियां लगाई गई थीं. बाद में पाबंदियां हटीं तो पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि पर्यटक आएंगे तो कश्मीर में एक बार फिर उनका धंधा चमकेगा. हालांकि ऐसा नहीं हुआ और मार्च से ही कोरोना वायरस के चलते देश के साथ-साथ कश्मीर में भी पर्यटन पूरी तरह से ठप पड़ा है. अब पर्यटन से जुड़े लोग सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनके लिए भी किसी आर्थिक पैकेज की घोषणा हो ताकि वे अपने धंधे को किसी हद तक संभाल सकें.
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उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में गुरुवार को 40 पुलिसकर्मियों को क्वारनटीन में भेजना पड़ा क्योंकि एक सब इंस्पेक्टर के बेटे में कोरोना का संक्रमण पाया गया है. इससे पहले बुधवार को पूरे प्रदेश में कोराना वायरस से संक्रमण के 22 नए मामले सामने आए, जिससे इस केंद्रशासित प्रदेश में इस महामारी से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 300 हो गई. सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने ट्वीट कर कहा, "जम्मू एवं कश्मीर से आज (बुधवार) 22 नए मामले सामने आए. जम्मू में चार और कश्मीर में 18 मामले. कुल मामलों की संख्या 300. जम्मू में 54 और कश्मीर में 246 मामले." बुधवार को संक्रमित हुए लोगां में से,18 कश्मीर संभाग से तो 4 मामले जम्मू संभाग के हैं. यहां कुल 300 संक्रमितों में से 34 स्वस्थ हो चुके हैं और चार की मौत हुई है.
कोरोना वायरस के संक्रमण का असर घाटी में भी काफी देखा जा रहा है. लोग यहां घरों में कैद हैं और जो लोग रोजगार में हैं, उन्हें कोई काम धंधा नहीं मिल रहा. डल झील में चलने वाली विशेष नाव शिकारा भी खाली पड़ी हैं. इस सीजन में जम्मू और कश्मीर में पर्यटकों की आवक बहुत तेज रहती है लेकिन लॉकडाउन में सबकुछ ठप पड़ा है. बाहरी पर्यटकों की कौन कहे, प्रदेश के स्थानीय लोग ही अपने घरों से नहीं निकल पा रहे. लोगों को उम्मीद थी कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद काम की रफ्तार पकड़ेगी लेकिन कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन ने सबकुछ बंद कर रखा है. देशी और विदेशी पर्यटक जहां तहां फंसे हैं जिनके हाल-फिलहाल कश्मीर में पर्यटन के लिए लौटना मुश्किल है.
कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
अशरफ वानी