कोविड-19: हिमाचल प्रदेश में चौकसी से संभले हालात

कोरोना महामारी के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पूरे सरकारी अमले के साथ शुरू से ही मुस्तैदी दिखाने से प्रदेश अब तक बड़े खतरे से बचा.

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शीर्ष अफसरों के साथ छत पर बैठक करते मुख्यमंत्री ठाकुर शीर्ष अफसरों के साथ छत पर बैठक करते मुख्यमंत्री ठाकुर

aajtak.in

  • शिमला,
  • 20 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

महीने भर पहले हिमाचल प्रदेश में कोरोना को लेकर सरकार ने कड़े कदम न उठाए होते तो आज एक वायरस ने इस पर्यटन प्रदेश का चेहरा ही बिगाड़ दिया होता. चौकन्नेपन का ही नतीजा था कि राज्य में कोविड-19 के न सिर्फ मामले कम आए बल्कि कुछ दिनों से आने बंद हो गए. अब प्रदेश 'कोरोना एग्जिट' की ओर कदम बढ़ा रहा है. हिमाचल ने मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, जिसकी अमेरिका समेत दुनिया भर में भारी मांग खड़ी हो गई है, का उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ा दिया है. अमेरिका के यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन ने इसी दवा के आयात को मंजूरी दी है. राज्य में यह दवा बनाने वाली कंपनियां सिप्ला, डॉ. रेड्डी'ज, कैडिला वगैरह को लॉकडाउन के बावजूद श्रमिकों का विशेष प्रबंध करते हुए उत्पादन बढ़ाने को कहा गया है. एग्जिट की दिशा में यह बड़ा कदम है.

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राज्य के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का दावा है कि प्रदेश में महीने भर के भीतर 80 फीसद कामकाज सामान्य ढंग से होने लगेगा. इंडिया टुडे के साथ खास बातचीत में वे राज्य भर में कोरोना का रास्ता रोकने से लेकर अर्थव्यवस्था और आम जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की अपनी रणनीतियों का खुलासा करते हैं. कुल 12 जिलों में करीब 68 लाख की आबादी वाले राज्य में 20 दिन के अंदर कोरोना के ऐक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान के तहत कई तरह के कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर जाकर 60 लाख की आबादी की ट्रैवल हिस्ट्री और संपर्कों का ब्यौरा खंगाल डाला गया. अब सरकार के पास मौजूद डेटा बैंक से किसी भी व्यक्ति के मूवमेंट और उसकी बीमारी की हिस्ट्री का पता एक क्लिक पर चल सकता है. इसके बाद हॉटस्पॉट चिन्हित कर वहां संपूर्ण लॉकडाउन का सख्त इंतजाम कर दिया गया.

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ठाकुर का कहना है, ''जहां पर केस नहीं है वहां चरणबद्ध ढंग से कामकाज शुरू होगा. राज्य के जो लोग दूसरे प्रदेशों में फंसे हैं और उनका क्वारंटीन समय खत्म हो गया है उन्हें धीरे-धीरे लाने का काम शुरू हो गया है. लेकिन जो प्राइमरी कॉन्टेक्ट में आए हैं वे लौटकर घर में क्वारंटीन होंगे.'' रेड और ऑरेंज श्रेणी वाले इलाकों को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर दफ्तरों में सचिव और विभागाध्यक्षों के साथ सामान्य कामकाज शुरू हो जाएगा. पूरे प्रदेश में मास्क पहनना अनिवार्य हो गया है. हर महिला मंडल सरकारी मदद से मास्क बना रहा है. स्कूल खुलने में ज्यादा देर हुई तो पढ़ाने में रेडियो-टीवी की भी मदद ली जाएगी.

दरअसल, मुख्यमंत्री ने बहुत जल्दी डिजिटल प्रणाली अपना कर वीडियो कॉन्फ्रेंस से रोज अधिकारियों और पार्टीजनों से संवाद कायम किया. तमाम विधायकों के साथ उनके क्षेत्रों में कोरोना और रोजमर्रा की दिक्कतों को सुलझाने के लिए बैठक की. कैबिनेट की बैठकों को ऑनलाइन किया. कोरोना के मामलों के लिए नजदीकी अस्पताल चिन्हित किए गए. कोरोना एग्जिट प्लान में अब पनबिजली परियोजनाओं, लोक निर्माण कार्यों और मनरेगा के लिए सामान्य क्षेत्रों में चरणबद्ध अनुमति मिलेगी ताकि दिहाड़ी मजदूर भी प्रभावित न हों.

हिमाचल में दरअसल एक तिब्बती नागरिक और कुछ तबलीगियों के चलते फैलाव हुआ है. अभी पांच जिलों में सबसे ज्यादा ऊना में 14 केस हैं और सभी तब्लीगी हैं. फिलहाल प्रदेश में 35 केस बचे हैं जो धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं. प्रदेश में लॉकडाउन से पहले ही कर्फ्यू लगाने के साथ पर्यटकों की आवाजाही रोक दी गई थी. शुरू के दो कोरोना पॉजिटिव में एक सिंगापुर और एक दुबई का था. उधर, तब्लीगी पठानकोट के रास्ते हिमाचल में लौटे. सरकार ने इनकी टावर लोकेशन से इन्हें पकड़ा. ये 172 लोग थे. कुछ ऊना की मस्जिद में रुके तो कोई नालागढ़ की. यानी बार्डर ऐरिया रेड जोन में आ गया, बाकी प्रदेश बच गया.

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मुख्यमंत्री कहते हैं कि हमने उन तब्लीगियों को वार्निंग दी और मोहलत भी कि वे सामने आ जाएं. इन सभी को क्वारंटीन किया गया और बाकियों की लोकेशन से उन्हें पकड़ा गया. उनके खिलाफ धारा 307 और 302 के तहत मामला दर्ज होगा. इस तरह प्राइमरी कॉन्टेक्ट भी सामने आ गए. ऐसे 52 लोग थे. कुल 600 लोगों को क्वारंटीन किया गया है. अब अधिकतर ब्लड सैंपल नेगेटिव आ रहे हैं. इस तरह सरकार की सतर्कता के कारण प्रदेश लॉकडाउन एग्जिट का रास्ता बना पाया.

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