'साक्षी मलिक कुश्ती लड़ सकती हैं तो हम क्यों नहीं'

रियो ओलंपिक में जब मेडल की आस टूटने लगी थी तो देश की बेटी साक्षी मलिक ने कुश्ती में ब्रॉन्ज जीतकर सवा अरब भारतवासियों का सीना चौड़ा कर दिया. साथ ही देश की और लड़कियों को भी इस खेल के लिए प्रेरित किया.

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महिला पहलवान महिला पहलवान

खुशदीप सहगल / अमित रायकवार

  • करौली, राजस्थान,
  • 09 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

रियो ओलंपिक में जब मेडल की आस टूटने लगी थी तो देश की बेटी साक्षी मलिक ने कुश्ती में ब्रॉन्ज जीतकर सवा अरब भारतवासियों का सीना चौड़ा कर दिया. साथ ही देश की और लड़कियों को भी इस खेल के लिए प्रेरित किया. हाल में रिलीज हुई फिल्म 'सुल्तान' में अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने भी पहलवानी के दांवपेच बड़े पर्दे पर दिखाए थे. लेकिन क्या ऐसा भी हो सकता है कि पहलवानी में करियर की ख्वाहिश रखने वाली कुछ लड़कियां दंगल में हिस्सा लेना चाहें और उन्हें रीति रिवाज का हवाला देकर मना कर दिया जाए. राजस्थान के करौली जिले में ऐसा ही हुआ.

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विधायक के समझाने पर महिला पहलवानों को मिली इजाजत
के दलील देने पर कि जब साक्षी मलिक कुश्ती लड़ सकती है तो हम क्यों नहीं, राजस्थान के विधायक और पूर्व मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने दखल दिया. मीणा ने लोगों के बीच पहुंचकर माइक लेकर कि बेटियों और बेटों में कोई फर्क नहीं होता. साथ ही किस तरह ओलंपिक में साक्षी मलिक, पीवी सिंधू और दीपा कर्माकर जैसी बेटियों ने देश का मान बढ़ाया.

दिल्ली की नीलम सोलंकी ने जीता 5100 रुपए का इनाम
इसके बाद पांच महिला पहलवानों को दिखाने की इजाजत आयोजकों की ओर से दी गई. दिल्ली की महिला पहलवान नीलम सोलंकी ने रोहतक की सीमा को मात देकर 5100 रुपए का इनाम जीता. दंगल को देखने के लिए करीब 1 लाख लोग जुटे. पुरुष पहलवानों में बाजी हरियाणा के जीतेश ने मारी जिन्हें 51000 रुपए का इनाम दिया गया. बता दें कि दंगल का आयोजन करौली के करीरी गाजीपुर गांव में भैरों बाबा के लक्खी मेले के दौरान किया गया था.

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