लिवरपूल ने इंग्लिश प्रीमियर लीग का खिताब जीत लिया है. चेल्सी ने जैसे ही मैनचेस्टर सिटी को हराया लिवरपूल का 30 साल से चला आ रहा खिताबी सूखा खत्म हो गया. लिवरपूल ने आखिरी बार 1989-90 में प्रीमियर लीग का खिताब जीता था. दरअसल, लिवरपूल के खिलाड़ियों ने मैदान पर कदम भी नहीं रखा. उसने चेल्सी की दूसरे नंबर पर काबिज मैनचेस्टर सिटी पर 2-1 से जीत से अपना खिताब सुरक्षित किया.
लिवरपूल का यह 19वां इंग्लिश प्रीमियर लीग का खिताब है. सर्वाधिक खिताब जीतने की बात करें, तो वह दूसरे स्थान पर है. मैनचेस्टर यूनाइटेड ने सर्वाधिक 20 बार इस ट्रॉफी पर कब्जा किया है.
लिवरपूल की इस कामयाबी का श्रेय मैनेजर जर्गेन क्लॉप को दिया जा रहा है. उनकी अगुवाई में टीम पिछले साल फाइनल में पहुंची थी. इस जीत के बाद उसके प्रशंसक इतने उत्साहित हो गए कि कोरोना काल में नियमों का ध्यान नहीं रखा. फैंस ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया.
लिवरपूल ने 7 मैच शेष रहते ही खिताब पर कब्जा कर लिया. इतनी जल्दी खिताब सुनिश्चित करने का यह रिकॉर्ड है. इससे पहले मैनचेस्टर यूनाइटेड ने 1907-08 में 5 मैच बाकी रहते खिताब पर कब्जा किया था.
लिवरपूल ने अब तक 31 मैचों में 86 अंक हासिल किए हैं. मैनचेस्टर सिटी इतने ही मैचों में 63 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है. दोनों में 23 अंकों का फर्क है. यानी सिटी बाकी बचे सात दौर के मैचों में लिवरपूल की बराबरी तक नहीं पहुंच पाएगा. चेल्सी के 54 अंक हैं और वह तीसरे स्थान पर काबिज लिस्टर सिटी से एक अंक पीछे और पांचवें नंबर के मैनचेस्टर यूनाइटेड से पांच अंक आगे है.
लिवरपूल ने ऐसे समय में यह खिताब जीता, जब कोरोना वायरस के कारण लीग लगभग तीन महीने तक ठप रही और इसके बाद मैचों का आयोजन खाली स्टेडियम में किया जा रहा है. लिवरपूल के मैनेजर जर्गेन क्लॉप ने कहा, ‘यह बहुत बड़ा क्षण है. मैं बेहद खुश हूं.’
स्टैमफोर्ड ब्रिज पर जब अंतिम सीटी बजी तो कुछ दर्जन दर्शक ही स्टेडियम के बाहर खड़े थे. लेकिन जल्द ही यह संख्या सैकड़ा पार कर गई तथा उन्होंने आतिशबाजी करके लिवरपूल की जीत का जश्न मनाया.
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