यूं तो इन दिनों युवाओं में फिट बॉडी और जिमिंग का क्रेज है, लोग खुद को फिट रखने के लिए जिम जाते हैं एक्सरसाइज करते हैं. पर फिटनेस को लेकर कुछ युवाओं में ऐसा जुनून सवार होता है कि वह इसको पेशे के तौर पर भी अपना लेते हैं. ऐसा ही एक नाम है अनिल बिष्ट. मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी के रहने वाले अनिल ने हाल में थाईलैंड में आयोजित बॉडी बिल्डिंग की मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है. उन्होंने बांग्लादेश और श्रीलंका के प्रतिभागियों को मात देकर मिस्टर यूनिवर्स (NBBUI) टाइटल अपने नाम किया. BPO कंपनी में नाइट शिफ्ट करते-करते अपनी सेहत को लेकर चिंता होने लगी तो उन्होंने जिमिंग शुरू की और फिर बॉडी बिल्डिंग को पेशे के तौर पर अपना लिया. .
अनिल बिष्ट ने अब तक के सफर के बारे में aaktak.in से खास बातचीत की. उनके पिता भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पिता के आर्मी में होने की वजह से अनिल की परवरिश भी उसी अनुशासन भरे माहौल में हुई. अनिल ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की. साथ ही उन्होंने 3डी एनीमेशन का भी कोर्स किया. 3 साल तक उन्होंने दिल्ली में ही एक बीपीओ कंपनी में काम किया. इस दौरान वह अपनी सेहत को लेकर परेशान रहने लगे, फिर 2010 से जिम जाना चालू किया. इसकी प्रेरणा उन्हें अपने जीजा से मिली. जिम में ट्रेनर की लापरवाही के चलते 2013 में अपना खुद का जिम खोला और लोगों को भी साथ में ट्रेन करना शुरू किया.
अब ये टाइटल कर चुके हैं अपने नाम
साल 2013 में ही उन्होंने बॉडी बिल्डिंग की पहली प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहां वह तीसरे स्थान पर रहे. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद प्रतियोगिता में हिस्सा लेते रहे और जीतते रहे. अनिल मिस्टर इंडिया (IBBFF), मिस्टर यूपी, मिस्टर दिल्ली, मिस्टर हिमाचल समेत कई अन्य टाइटल जीते. इसी लय को बरकरार रखते हुए अनिल ने थाईलैंड में मिस्टर यूनिवर्स अंडर 60 किलो वेट कैटेगरी का ख़िताब भी अपने नाम किया. उन्होंने बांग्लादेश और श्रीलंका के प्रतिभागियों को मात दी.
... जबरदस्त बॉडी, शेप का राज
बॉडी बिल्डर्स की जबरदस्त बॉडी, शेप साइज सिमिट्री लोगों को अच्छी लगती है, लेकिन इसके पीछे की मेहनत एक बॉडी बिल्डर ही जानता है. अनिल कहते हैं कि बॉडी बिल्डिंग काफी मेहनत का काम है और इसके लिए आपको अपने पर काफी ध्यान देना पड़ता है. दुनिया से दूर, सबसे से कट के रहना पड़ता है. साथ ही पार्टी और लजीज खाने से इतर उबला खाना खाना पड़ता है. कई बार नमक और पानी तक छोड़ना पड़ता है.
पैसे वाला पेशा है बॉडी बिल्डिंग?
बॉडी बिल्डिंग भले ही आपको फिट रखता हो पर जब आप इसे अपना पेशा बनाते हैं तो इसके जरिए कमाई भी करना चाहते हैं. इस पर अनिल कहते हैं, 'बॉडी बिल्डिंग में उतना पैसा नहीं है, जितना कि दूसरे पेशों में है. कई बार इसमें कमाई से ज्यादा खर्च हो जाता है. साथ ही बॉडी बिल्डर्स को आसानी से स्पॉन्सर भी नहीं मिलते हैं. अपने बारे में कहा, अभी मुझे भी कोई स्पॉन्सर नहीं मिल रहा है. आमेचर ओलम्पिया प्रो कार्ड जीतना चाहता हूं, जिसे बॉडी बिल्डिंग में भारत में सबसे बड़ा टाइटल माना जाता है.'
एक्सरसाइज से दूर तो बीमारियों के करीब
बॉडी बिल्डिंग को कई बार जेनेटिक्स शब्द से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि मेहनत तो काफी लोग करते हैं, लेकिन जेनेटिक्स जिनके सही होते हैं वही कामयाबी हासिल करते हैं. इससे जुड़े कई मिथक हैं. इनके बारे में अनिल का मानना है कि इन पर ध्यान न देते हुए लोगों को सिर्फ कड़ी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए. सिर्फ जीन्स से बॉडी नहीं बनती है इसके लिए कड़ी मेहनत लगती है. बॉडी फिटनेस की जब बात होती है तो लोग कार्ब्स को अपना दुश्मन मानने लगते हैं. उन्हें लगता है इससे वो मोटे होते हैं. इस पर अनिल कहते हैं कि कार्ब्स दुश्मन नहीं है, बाकी न्यूट्रिएंट की तरह ही शरीर के लिए जरूरी है पर ज्यादा कार्ब्स दुश्मन बन जाता है. फिटनेस को लेकर अनिल का कहना है कि समय ना होने का बहाना न बनाते हुए लोगों को एक्सरसाइज को देना ही चाहिए. जितना आप एक्सरसाइज से दूर भागोगे उतना ये आपको बीमारियों और डॉक्टर के नजदीक लेकर जाएगा.
अपर्णा रांगड़