Aanchal Thakur: भारत की युवा स्की एथलीट आंचल ठाकुर ने हाल ही में मोंटेनेग्रो में आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत देश का नाम रोशन किया. 25 साल की आंचल ठाकुर भारत की पहली ऐसी स्की एथलीट हैं, जिन्होंने स्कीइंग की अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप में दो मेडल जीते हो. लेकिन इसके बाद भी लगातार उन्हें सरकार की ओर से उतनी मदद नहीं मिल पा रही है, जिसकी उन्हें दरकार है.
मोंटेनेग्रो में इतिहास रचने वाली आंचल ठाकुर ने aajtak.in से खास बातचीत की और अपनी फाइनल रेस के बारे में बताया. आंचल के मुताबिक, ‘जब स्कीइंग चैम्पियनशिप की फाइनल रेस थी, उस दिन मौसम काफी ठीक था. लेकिन उससे मौसम खराब हुआ था जिसकी वजह से रेस में उन्हें दिक्कत हुई. इतना ही नहीं वह गिर भी गई थीं, लेकिन जिस दिन ब्रॉन्ज़ के लिए मुकाबला था, वह दर्द के साथ ही माइनस तापमान में रेस करने पहुंचीं’.
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'पिता ने उधार पर पैसे लेकर ट्रेनिंग करवाई'
साल 2018 में टर्की में हुई चैम्पियनशिप में भी मेडल जीत चुकी आंचल का ये दूसरा मेडल है. वह देश की इकलौती ऐसी स्की एथलीट हैं, जिनके नाम ये उपलब्धि दर्ज है लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्कीइंग फेडरेशन से सपोर्ट नहीं मिलता है, साथ ही ट्रेनिंग के लिए भी खर्च निकालने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है.
सरकार या अन्य संस्थानों के समर्थन को लेकर आंचल ने कहा, ‘फेडरेशन की ओर से काफी कम सपोर्ट मिलता है, जो भी किया हो वो पापा ने ही किया है. हालांकि, इस बार हमें सरकार की ओर से पांच-पांच लाख रुपये दिए गए लेकिन उससे काफी मदद नहीं हो पाती है. क्योंकि ट्रेनिंग, ट्रैवल और बाकी खर्चा मिलाएं तो एक हफ्ते में ही पांच लाख रुपये तक खर्च होते हैं’.
आंचल ठाकुर को उम्मीद है कि सरकार या फेडरेशन आगे आकर उनकी मदद करेगा, क्योंकि इस खेल को वैसे ही भारत में कम तवज्जो मिलती है. ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय कोच मिलता है तो आने वाले विंटर ओलंपिक के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.
पीएम मोदी को पैलाग्लाइडिंग सिखा चुके हैं पिता
आंचल ठाकुर के पिता रोशन लाल ठाकुर को अपनी बेटी की ट्रेनिंग के लिए रिश्तेदारों और अन्य लोगों से उधार लेना पड़ रहा है. आंचल ठाकुर के मुताबिक, अभी तक पापा का 40 लाख रुपये का खर्च हो गया है जो उधार लिया है. रोशन लाल ठाकुर खुद मनाली में ही पैराग्लाइडिंग सिखाते हैं, खास बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 1997 में सोलांग पहुंचे थे, तब उन्होंने पैराग्लाइडिंग में हाथ आजमाया था और रोशन लाल ठाकुर ने ही उन्हें ये सिखाया था.
'ट्रेनिंग के लिए लगवाई फाइज़र वैक्सीन'
कोरोना काल के बीच आई मुश्किलों को लेकर आंचल ठाकुर ने बताया कि कोरोना के कारण ट्रेनिंग हो ही नहीं पाई थी, ऐसे में 2021 में जो चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया वो बिना किसी ट्रेनिंग के ही हिस्सा लिया. हालांकि, इस साल भी आंचल ने खेलो इंडिया में दो मेडल जीते हैं. इसके अलावा मोंटेनेग्रो में हुई चैम्पियनशिप से पहले उन्होंने ऑस्ट्रिया में जाकर ट्रेनिंग ली है.
आंचल ने बताया कि जब वह यहां पर आईं, तो सबसे बड़ी दिक्कत कोरोना वैक्सीन को लेकर आई. क्योंकि जिस ग्लेशियर में ट्रेनिंग होनी थी, वहां पर कोविशील्ड को मंजूरी नहीं मिली थी. ऐसे में यहां पहुंचकर उन्हें सबसे पहले फाइज़र की वैक्सीन लगवानी पड़ी. जिसके बाद ही ट्रेनिंग शुरू हो पाई.
आंचल ठाकुर की नज़र अब विंटर ओलंपिक पर टिकी है, जहां वह एक बार फिर देश का परचम लहराना चाहती हैं.
मोहित ग्रोवर