अर्जेंटीना की टीम फीफा वर्ल्ड कप 2022 के सेमीफाइनल में पहुंच गई है. क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से पराजित किया. अब सेमीफाइनल में लियोनेल मेसी की टीम का सामना क्रोएशिया से होगा जिसने पांच बार की चैम्पियन ब्राजील को पेनल्टी शूटआउट में हराया था. लियोनेल मेसी का यह आखिरी वर्ल्ड कप है ऐसे में वह विश्व ट्रॉफी जीतकर अपने शानदार करियर पर विराम लगाना चाहेंगे.
लियोनेल मेसी के हाथ में लगी बॉल
मुकाबले के दौरान जमकर बवाल भी हुआ. पहला बवाल खेल के 55वें मिनट में हुआ जब गेंद मेसी के हाथ से लग गई.चूंकि गेंद मेसी के हैंड से लगी थी ऐसे में इस स्टार प्लेयर को येलो कार्ड मिलना चाहिए. हालांकि रेफरी का मानना था कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया है जिसके चलते मेसी को येलो कार्ड दिए बिना छोड़ दिया गया. इस वाकये को 'हैंड ऑफ गॉड' मोमेंट कहा जा रहा है.
नीदलैंड के फैन्स मैच रेफरी के फैसले से काफी नाराज दिखे, एक फैन ने कहा, 'यह मेसी का आखिरी वर्ल्ड कप है. लेकिन सबके साथ समान व्यवहार करने की जरूरत है. यह रेफरी वास्तव में एकतरफा लगता है.' एक और फैन ने कहा, 'नीदरलैंड बेकार खेला है लेकिन रेफरी निश्चित रूप से अर्जेंटीना की मदद कर रहा है, न केवल मेसी की वजह से.'
डिएगो माराडोना की आई याद
'हैंड ऑफ गॉड' का जिक्र आते ही फुटबॉल फैन्स को अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना की याद आ जाती है. साल 1906 के वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में माराडोना ने हाथ की मदद से गोल किया था जो इस खेल के नियमों के विरुद्ध है. माराडोना ने वर्षों बाद स्वीकार किया था कि उन्होंने जान बूझकर गेंद को हाथ लगाया था. हालांकि उसी मैच में चार मिनट बाद हालांकि उन्होंने ऐसा गोल दागा था, जिसे फीफा ने विश्व कप के इतिहास का महानतम गोल करार दिया.
दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच हुई झड़प
अर्जेंटीना-नीदलैंड में बवाल यही नहीं रूका. इस मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए. दरअसल अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस ने नाथन एके को जमीन पर गिरा दिया जिसके चलते और रेफरी ने फाउल दे दिया. परेडेस इससे आगबबूला हो गए् और उन्होंने गेंद को नीदरलैंड के डगआउट में दे मारा. बाद में नीदरलैंड के खिलाड़ी परेडेस से लड़ने के लिए पहुंच गए. मैच रेफरी ने किसी तरह बवाल को शांत कराया.
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