Former Australian captain Mark Taylor on Mohammed Siraj: टीम इंडिया इन दिनों ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए 5 टेस्ट मैचों की सीरीज में भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें फिलहाल 1-1 से बराबरी पर हैं. इस बीच भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज सुर्खियों में हैं. दरअसल, मैदान में उनकी आक्रामकता पर ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों ने सवाल खड़े किए हैं.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर का मानना है कि मोहम्मद सिराज में अंपायर के फैसले का इंतजार किए बिना समय से पहले विकेट लेने का जश्न मनाने की आदत है. भारतीय टीम में उनके सीनियर साथियों को इस मुद्दे पर इस तेज गेंदबाज से बात करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करना बुरा लगता है.
'जश्न मनाने के लिए अपने साथियों की तरफ दौड़ पड़ते हैं'
टेलर ने कहा कि सिराज को जब लगता है कि उन्होंने बल्लेबाज को आउट कर दिया है तो वह अंपायर का फैसला आने से पहले ही जश्न मनाने के लिए अपने साथियों की तरफ दौड़ पड़ते हैं.
टेलर ने नाइन न्यूज से कहा,‘जहां तक मोहम्मद सिराज का सवाल है तो मैं चाहूंगा कि उनकी टीम के सीनियर साथी उनसे बात करें. ट्रेविस हेड के साथ जो हुआ उसके बारे में इतना नहीं, बल्कि इस चीज को लेकर उनसे बात की जानी चाहिए कि जब उन्हें लगता है कि उन्होंने बल्लेबाज को आउट कर दिया है तो वह अंपायर का फैसला देखने के लिए पलटते नहीं है और जश्न मनाना शुरू कर देते हैं. मुझे लगता है कि यह उनके और खेल के लिए अच्छा नजारा नहीं होता है.’
उन्होंने कहा,‘मुझे उसका जोश पसंद है, मुझे उसका प्रतिस्पर्धी स्वभाव पसंद है, मुझे यह तथ्य पसंद है कि हमारे पास वास्तव में एक अच्छी सीरीज चल रही है, लेकिन खेल का सम्मान भी है जिसे बनाए रखने की जरूरत है. मुझे लगता है कि सीनियर साथियों के साथ बात करने से उसे इस चीज को समझने में मदद मिलेगी.’
सिराज पर मैच फीस का 20 प्रतिशत जुर्माना लग चुका है
एडिलेड में गुलाबी गेंद से खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में हेड से संक्षिप्त बहस करने के बाद सिराज चर्चा का विषय बन गए हैं. ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 10 विकेट से जीतकर 5 मैच की सीरीज 1-1 से बराबर की. सिराज पर इसके लिए उनकी मैच फीस का 20 प्रतिशत जुर्माना लगा.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज साइमन कैटिच का मानना है कि सिराज के दिमाग ने कुछ देर के लिए काम नहीं किया और इस भारतीय तेज गेंदबाज को बाद में इसका पछतावा भी हुआ. कैटिच ने एसईएन रेडियो से कहा, ‘यह शर्मनाक है कि सिराज ने तब दिमाग से काम नहीं लिया. खेल में इस तरह के व्यवहार की कोई जरूरत नहीं है.’
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