नहीं रहे बॉब विलिस, संदीप पाटिल ने उनके एक ओवर में मारे थे 6 चौके

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और आक्रामक तेज गेंदबाज बॉब विलिस का 70 साल की उम्र में निधन हो गया. विलिस 1982 से 1984 के बीच इंग्लैंड के कप्तान रहे, जिन्होंने 90 टेस्ट मैच खेले.

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England great Bob Willis 1949-2019 (Twitter) England great Bob Willis 1949-2019 (Twitter)

aajtak.in

  • लंदन,
  • 05 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:21 AM IST

  • विलिस का 70 साल की उम्र में निधन हो गया
  • 1982 से 1984 के बीच इंग्लैंड के कप्तान रहे

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और आक्रामक तेज गेंदबाज बॉब विलिस का 70 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके परिवार ने यह जानकारी दी. विलिस 1982 से 1984 के बीच इंग्लैंड के कप्तान रहे, जिन्होंने 90 टेस्ट मैच खेले. उन्होंने 1981 में एशेज में तीसरे टेस्ट की दूसरी पारी में 43 रन देकर आठ विकेट चटकाए थे. विलिस ने अपने टेस्ट करियर में 325 विकेट चटकाए थे.

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विलिस परिवार ने एक बयान में कहा ,‘हमारे प्रिय बॉब अब इस दुनिया में नहीं रहे. वह एक आदर्श पति, पिता, भाई और दादा थे. उन्होंने अपने संपर्क में आने वाले सभी लोगों को प्रभावित किया. हमें उनकी कमी बहुत खलेगी.’

'होम ऑफ क्रिकेट' कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड की ओर से बॉब विलिस के निधन पर शोक व्यक्त किया गया है. उसके ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर लिखा गया है - मेरिलबॉन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के मानद सदस्य बॉब विलिस के निधन के बारे में सुनकर हम बहुत दुखी हैं. लॉर्ड्स के दिग्गज और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जिनका नाम तीन बार सम्मान बोर्ड पर अंकित है. हमारे विचार उनके दोस्तों और परिवार के साथ हैं.'

कैरेबियाई दिग्गज विव रिचर्ड्स ने लिखा- दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए दुखद समय. रेस्ट इन पीस बॉब! आपने पिच पर जो किया है उसके लिए हमेशा याद किए जाएंगे.

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बॉब विलिस का नाम भारत के पूर्व धाकड़ क्रिकेटर संदीप पाटिल से भी जुड़ा है. दरअसल, उन्होंने एक ओवर में छह चौके जड़ने का कारनामा किया था.

इंग्लैंड के खिलाफ 1982 के मैनचेस्टर टेस्ट में उन्होंने नाबाद 129 रनों की जोरदार पारी खेली. सबसे बढ़कर पाटिल ने उस नाबाद पारी के दौरान तेज गेंदबाज बॉब विलिस के एक ओवर में छह चौके जड़ दिए थे.

उस ऐतिहासिक ओवर की तीसरी गेंद नो बॉल थी. इसके बाद से टेस्ट क्रिकेट में तीन और बल्लेबाजों ने इस रिकॉर्ड को दोहराया है. जिनमें क्रिस गेल (2004), रामनरेश सरवन (2006) और सनथ जयसूर्या (2007) शामिल हैं.

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