एजबेस्टन टेस्ट से न्यूट्रल अंपायर व्यवस्था पर उठे सवाल, गैटिंग-पोन्टिंग आमने-सामने

एजबेस्टन में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज के पहले टेस्ट में अंपायर जोएल विल्सन और अलीम डार का खराब प्रदर्शन चर्चा में रहा. इसने फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या टेस्ट मैचों में अपना श्रेष्ठ देने वाले सर्वश्रेष्ठ अंपायर हैं?

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एजबेस्टन टेस्ट से न्यूट्रल अंपायर व्यवस्था पर उठे सवाल (Reuters Photo) एजबेस्टन टेस्ट से न्यूट्रल अंपायर व्यवस्था पर उठे सवाल (Reuters Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:45 PM IST

टेस्ट क्रिकेट में पहले घरेलू अंपायर ही हुआ करते थे. 25 साल पहले इस व्यवस्था को बदलकर टेस्ट क्रिकेट में न्यूट्रल अंपायर को लाया गया. यानी जिन दो देशों में टेस्ट मैच हो रहा है, उनकी जगह दूसरे देशों के तटस्थ अंपायरों को मैच की निगरानी का जिम्मा दिया गया. दरअसल, ये व्यवस्था इसलिए लाई गई क्योंकि तब घरेलू अंपायरों के फैसलों में पक्षपात की बहुत शिकायतें आने लगी थीं.   

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लेकिन हाल में एजबेस्टन में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज के पहले टेस्ट में अंपायर जोएल विल्सन और अलीम डार का खराब प्रदर्शन चर्चा में रहा. इसने फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या हमारे पास टेस्ट मैचों में अपना श्रेष्ठ देने वाले सर्वश्रेष्ठ अंपायर हैं?  

एमसीसी में वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन माइक गैटिंग की बात करें तो वो न्यूट्रल अंपायरों की अनिवार्य व्यवस्था को हटाने के लिए अधिक उत्सुक नजर नहीं आते. उनका कहना है कि क्या आप सभी टेस्ट मैचों में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अंपायर चाहते हैं? ये तब तक मुश्किल है जब तक आपके पास वास्तव में मजबूत पैनल नहीं होगा.

क्या है माइक गैटिंग की राय?

माइक गैटिंग कहते हैं, 'इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के पास 7 इलीट अंपायर हैं लेकिन आप उन्हें एशेज में नहीं खड़ा कर सकते. अगर आपके पास श्रेष्ठ अंपायर हैं तो क्या आप उन्हें इस्तेमाल करने में समर्थ हो पा रहे हैं? आपको होना चाहिए. इसलिए अब हम ये बहस कर रहे हैं. मैं समझता हूं कि अब अंपायरों को टीवी पर अपनी गलतियां देखने के लिए तकनीक और उपकरण मौजूद हैं. इससे उनके पास अपने प्रदर्शन को सुधारने की पर्याप्त संभावना है. वो प्रैक्टिस कर सकते हैं, दोबारा सोच-समझ सकते हैं कि क्यों उन्होंने किया, क्या उन्होंने किया?'

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वक्त वक्त पर ऐसी बातें सामने आती रहती हैं कि अच्छे अंपायरों पर तटस्थता के लिए भरोसा किया जाए. जब एशेज टेस्ट सीरीज में साइमन टफेल और डेविड शेफर्ड जैसे उच्च कोटि के अपांयर नहीं खड़े होते हैं तो ऐसे सुझाव आते हैं कि श्रेष्ठ अंपायरों को ही मौका दिया जाए चाहे उनके देश की टीमें ही क्यों ना खेल रही हों.  

हालिया एजबेस्टन टेस्ट की बात की जाए तो कुल 20 फैसलों की समीक्षा की गई. अंपायर विल्सन के लिए ये खास तौर पर खराब प्रदर्शन वाला टेस्ट रहा. ऐसे में न्यूट्रल अंपायरों की व्यवस्था पर फिर सवाल उठने शुरू हो गए.

क्या कहते हैं रिकी पोंटिंग?

आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग इस मामले में काफी मुखर हैं. पोन्टिंग ने क्रिकेट आस्ट्रेलिया की वेबसाइट से कहा, “लोग कह सकते हैं कि जैसी तकनीक अब हमारे पास है, ये अधिक मायने नहीं रखता. लेकिन ये अच्छा नजारा नहीं होता जब साफ तौर पर दिखने वाले गलत फैसले सामने आते हैं. श्रेष्ठ अंपायर सभी बड़े टूर्नामेंट से बाहर दिखाई दे सकते हैं. ये उन्हें जल्दी रिटायरमेंट के लिए मजबूर कर सकता है.”

बता दें कि माइक गैटिंग खुद भी 1987 में पाकिस्तान के दौरे पर फैसलाबाद टेस्ट में खराब फैसले पर अंपायर शकूर राणा के साथ तीखी तकरार में उलझे थे. ये वाकया बहुत सुर्खियों में रहा था. गैटिंग उस वाकये को याद कर न्यूट्रल अंपायर रखने के फायदे को नुकसान से ज्यादा भारी मानते हैं.

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गैटिंग कहते हैं, “हमारे पास कुछ शानदार अंपायर हैं. अफसोस की बात है कि उस शख्स (अंपायर विल्सन) के लिए आखिरी टेस्ट मैच बहुत बुरा गेम रहा. या यूं कहें कि दोनों (विल्सन और अलीम डार) के लिए ऐसा रहा. अंपायरिंग की टीचिंग अब काफी अधिक है. उपकरण बेहतर हो रहे हैं. जब आप बीच में होते हैं, अगर आपने गेम खेला है, तो आप बहुत  शोर के बीच भी बैट पैड की बारीकी को समझ सकते हैं. यदि आपने गेम नहीं खेला, तो कभी-कभी यह ज्यादा मुश्किल होता है. देखिए, लोग गलती करते हैं और लोग बेहतर हो सकते हैं. उपकरण उन्हें बेहतर बनाने के लिए मौजूद हैं.  मुझे लगता है कि हम फिलहाल सुरक्षित जमीन पर हैं.''

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