अफ़ाक हुसैन: पाकिस्तान के लिए खेलने वाला लखनऊ में पैदा हुआ टेस्ट क्रिकेटर, जो कभी आउट नहीं हुआ

अफ़ाक हुसैन का जन्म 31 दिसंबर 1939 को भारत के लखनऊ में हुआ. बंटवारे के वक़्त उनका परिवार पाकिस्तान चला गया और कराची में बस गया. अफ़ाक ने 18 साल की उम्र में फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट की शुरुआत की. 1957-58 के सीज़न में उन्होंने कायद-ए-आज़म ट्रॉफ़ी में कराची-बी टीम की ओर से क्वेट्टा के ख़िलाफ़ अपना पहला मैच खेला.

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अफ़ाक हुसैन की कहानी (फोटो: Getty) अफ़ाक हुसैन की कहानी (फोटो: Getty)

केतन मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 31 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:37 PM IST

क्रिकेट की किताबें उन नामों से भरी पड़ी हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वो अच्छे खिलाड़ी थे लेकिन उन्हें मौके नहीं मिले. ऐसा ही एक नाम है पाकिस्तान के स्पिन गेंदबाज़ अफ़ाक हुसैन का. 60 के दशक की शुरुआत में अफ़ाक एक बड़ा नाम थे और पाकिस्तानी टीम में जगह पाने के मजबूत दावेदार भी थे. लेकिन उनके हाथ महज़ 2 टेस्ट मैच लगे. अफ़ाक ने 1961 में अपना पहला टेस्ट खेला. पाकिस्तान के लिये ये इस साल की दूसरी टेस्ट सीरीज़ थी. इससे पहले टीम भारत के दौरे पर गयी हुई थी जहां पांचों टेस्ट मैच ड्रॉ हुए. इसके बाद अक्टूबर 1961 में टेड डेक्सटर की कप्तानी में इंग्लैण्ड की टीम पाकिस्तान आयी. इसी सीरीज़ के पहले मैच में अफ़ाक हुसैन को पाकिस्तान के लिये खेलने का मौका मिला.

लाहौर में खेले जाने वाले इस मैच के लिये तीन स्पिनरों को चुना गया - इंतिखाब आलम, हसीब अहसान और अफ़ाक हुसैन. ये पाकिस्तानी क्रिकेट का शुरुआती दौर था और इस वक़्त इनके तेज़ गेंदबाज़ प्राइमरी रोल निभाते थे. फ़ज़ल महमूद (जो पाकिस्तान की कप्तानी भी संभालते थे) और महमूद हुसैन अपनी तेज़ गेंदों के साथ आगे चलते थे. अफ़ाक के टीम में आने से 2 साल पहले इन्तिख़ाब आलम आये थे और उन्होंने शुरुआती दिनों से ही टीम में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली थी. अफ़ाक के डोमेस्टिक क्रिकेट के साथी नसीम-उल-गनी भी धीमी गेंदबाज़ी की जगह पा चुके थे. इसके साथ ही हसीब अहसान भी ऐसा नाम बन रहे थे जो टीम का हिस्सा बनता दिख रहा था. ऐसे में, स्पिन गेंदबाज़ी के स्पॉट की दावेदारी के लिये ये बहुत अच्छा समय नहीं था.

अफ़ाक हुसैन का जन्म 31 दिसंबर 1939 को भारत के लखनऊ में हुआ. बंटवारे के वक़्त उनका परिवार पाकिस्तान चला गया और कराची में बस गया. अफ़ाक ने 18 साल की उम्र में फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट की शुरुआत की. 1957-58 के सीज़न में उन्होंने कायद-ए-आज़म ट्रॉफ़ी में कराची-बी टीम की ओर से क्वेट्टा के ख़िलाफ़ अपना पहला मैच खेला. बल्लेबाज़ी के क्रम में उन्हें सबसे आख़िरी में भेजा गया और उनका पहला फ़र्स्ट क्लास स्कोर रहा नाबाद 16 रन. नॉट आउट रहने के मामले में अफ़ाक हुसैन ने एक रिकॉर्ड बनाया. पाकिस्तान टीम में आने के बाद उनके हिस्से 2 टेस्ट मैच आये. 

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Afaq Hussain (ऊपरी पंक्ति में दाएं से चौथे)

दोनों टेस्ट मैचों की दोनों पारियों में उन्हें बल्लेबाज़ी भी मिली. इन चार पारियों में उनके स्कोर थे - 10, 35, 8 और 13. मज़ेदार बात ये है कि चारों मौकों पर वो आउट ही नहीं हुए. इस तरह से अपने टेस्ट करियर में बगैर आउट हुए सबसे ज़्यादा रन बनाने वालों में अफ़ाक हुसैन सबसे आगे हैं. हालांकि पाकिस्तान के ही हसन चीमा अपने 7 टेस्ट मैचों में कभी भी आउट नहीं हुए. उनके हिस्से 5 बार बल्लेबाज़ी का मौका आया लेकिन उन्होंने 1 ही रन बनाया. 

अपने पहले टेस्ट मैच में अफ़ाक हुसैन ने एक विकेट लिया. ये उनके करियर का एकमात्र टेस्ट विकेट रहा. उन्होंने इंग्लैण्ड कप्तान टेड डेक्सटर को 20 रन पर हिट-विकेट आउट किया. टेड ने अगली पारी में नाबाद रहते हुए 66 रन बनाए और इंग्लैण्ड को जीत तक ले गए. इसके बाद सीरीज़ का दूसरा टेस्ट 3 महीने बाद हुआ. असल में, इंग्लैण्ड की टीम पहला मैच खेलने के बाद इंडिया चली गयी और यहां उन्होंने 5 टेस्ट मैच खेले. इंडिया के हाथों 2-0 से सीरीज़ हारने के बाद इंग्लिश टीम बाकी के 2 टेस्ट मैच खेलने के लिये वापस पाकिस्तान आयी. इन 3 महीनों में अफ़ाक ने कायद-ए-आज़म ट्रॉफ़ी में कराची व्हाइट्स के लिये खेला. जनवरी के तीसरे हफ़्ते में होने वाले दूसरे टेस्ट के लिये जब टीम चुनी गयी, अफ़ाक के नाम को सेलेक्टर्स ने नज़र-अंदाज़ कर दिया.

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इसके बाद अफ़ाक हुसैन को 1962 के इंग्लैण्ड टूर के लिए चुना गया. लेकिन यहां उन्हें एक बार भी आधिकारिक टेस्ट मैच में जगह नहीं मिली. टूर पर खेले गए कुल 36 मैचों (29 फर्स्ट क्लास मैच और 7 टूर मैच) में उन्हें 6 मैचों जगह मिली. इस टूर पर अफ़ाक हुसैन के साथ हसीब अहसान गए हुए थे. हसीब को पैर की चोट लगने के बाद अफ़ाक ही उनकी जगह के हक़दार थे लेकिन कप्तान जावेद बुर्की ने रावलपिंडी के खिलाड़ी जावेद अख्तर को बुला लिया.

वापस आकर अफ़ाक ने डोमेस्टिक क्रिकेट में फिर से अच्छा प्रदर्शन शुरू किया और इसकी बदौलत उन्हें पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की ईग्लेट्स टीम का हिस्सा बनने का मौका मिला जो इंग्लैण्ड के दौरे पर गयी. इसके बाद उन्होंने अगले एक साल में 23 विकेट लिये और फिर उन्हें पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की टीम के साथ ईस्ट अफ़्रीका जाने का मौका मिला. यहां से उन्हें सेलेक्टर्स ने फिर पाकिस्तान टीम के लिये चुना. मेलबर्न टेस्ट मैच में उन्हें अंतिम एकादश में भी जगह मिली. लेकिन ये मैच विकेट-रहित रहा. हालांकि यहां भी दोनों पारियों में वो आउट नहीं हुए.

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