सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को सुनवाई पूरी कर ली थी. आज हुई सुनवाई के दौरान SC की पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि प्रेम मानवता का मूलभूत गुण है. शादी करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है.