ममता बैनर्जी ने खुद को सुभाष चंद्र बोस से तुलना की है, जो सुनने में चौंकाने वाली बात है. नेताजी ने अपनी पूरी जिंदगी देश की आजादी के लिए समर्पित कर दी थी और विदेशी ताकतों से लड़ाई लड़ी थी. उनकी बहादुरी और बलिदान की भावना युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रही. हालांकि, ममता बैनर्जी की ये तुलना ठीक नहीं लगती क्योंकि नेताजी का इतिहास और योगदान बहुत गहरा और महान है.