पौष पूर्णिमा के प्रथम स्थान पर लगभग 31 लाख श्रद्धालुओं ने अमृत के जल में डुबकी लगाई और सौभाग्य प्राप्त किया. मेले में सभी व्यवस्थाएं सामान्य और सुचारू रूप से संचालित हुईं. श्रद्धालुओं और आचार्यों द्वारा व्यवस्थाओं की प्रशंसा की गई. भीड़ में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई और जहां भी कोई कमी पाई गई.