कश्मीर में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद सवाल है—जब राष्ट्रपति शासन के दौरान ऐसी घटनाएं नहीं हुईं, तो अब क्यों हो रही हैं? वही कश्मीर, वही लोग, वही ट्रेनिंग और वही व्यवस्था होने के बावजूद सुरक्षा में चूक कैसे हुई?