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Indian Maritime Border: कैसे तय होती समंदर की सीमा? यहां देखते ही गोली मार देती है सेना

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 8:54 AM IST
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किसी भी देश का सीमाई अधिकार उसकी जमीन तक ही सीमित नहीं रहता. उसे ऐसा ही कुछ अधिकार समुद्र में भी मिलता है. सागरों और महासागरों पर देशों के अधिकार तय करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौता किया गया था. इसे संयुक्त राष्ट्र की समुद्री कानूनी संधि यानी UNCLOS-1982 के तहत किया गया था. इसी में नियम, कायदे और कानून तय हैं. (फोटोः सत्येंद्र सिंह/ट्विटर)

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इस नियम का मकसद है कि दो देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर किसी तरह का झगड़ा न हो. है तो उसे खत्म कर दिया जाए. किसी भी देश की सीमा को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. पहला हिस्सा वो होता है जिसमें देश के आसपास के द्वीप आते हैं. इन द्वीपों को समुद्री सीमा में शामिल करने वाली रेखा को आधार सीमा कहते हैं. आधार सीमा 12 समुद्री मील यानी 22.22 किलोमीटर होती है. (फोटोः गेटी)

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फिर आती है क्षेत्रीय सीमा यह 24 समुद्री मील होती है. यानी 44.44 किलोमीटर की दूरी तक. फिर आता है एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) यानी वो सीमा जिसके अंदर से किसी भी तरह का समुद्री व्यापार होता है. फिर आता है हाई सी यानी 200 समुद्री मील की सीमा जो 370 किलोमीटर पर होती है. यह किसी देश की सीमा नहीं होती. इस पर पूरे विश्व का अधिकार होता है. इसके उपयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ नीतियां बनाता है. (फोटोः गेटी)

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भारत एक प्रायद्वीपीय देश है, यानी उसके तीन तरफ समुद्र है. इसी समुद्री मार्ग से व्यापार होता है. भारत की कुल तटीय सीमा 7516.6 किलोमीटर है. भारत के 9 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश समुद्री सीमा से सटे हैं, या उनके अंदर हैं. भारत के तटीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं- गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन-दीव, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल. इसके अलावा द्वीपीय राज्य हैं- अंडमान निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप द्वीप समूह. (फोटोः गेटी)

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भारतीय नौसेना या कोस्ट गार्ड के पास तट से 22.22 किलोमीटर तक संपूर्ण अधिकार होता है. इसे ही प्रादेशिक समुद्री सीमा (Territorial Sea Border) कहते हैं. इसमें घुसपैठ करने पर सेना कड़ी कार्रवाई कर सकती है. चेतावनी देकर वापस जाने को कह सकती है. अगर घुसपैठ नहीं रुकती तो गोलियां भी बरसा सकती है. इसके बाद की 44.44 किलोमीटर की समुद्री सीमा में सीमा शुल्क, साफ-सफाई और कारोबार करने का अधिकार भारत सरकार के पास है. ऐसा लगभग हर देश के साथ होता है. (फोटोः गेटी)

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370 किलोमीटर वाली EEZ तक भारत तीन तरह के काम कर सकता है. नए द्वीपों को बनवा सकता है. साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट कर सकता है. इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों का पूरा उपयोग कर सकता है. प्रादेशिक सीमा यानी टेरिटोरियल सी से EEZ अलग होता है. भारत की इस सीमा में सभी विदेशी जहाजों और सबमरीन को घुसने के लिए इनोसेंट पैसेज (Innocent Passage) का भरोसा दिलाना होता है. यानी वह युद्धपोत, सबमरीन या व्यापारिक जहाज भारत के लिए खतरा नहीं है. (फोटोः गेटी)
 

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भारत की 7516 KM लंबी सीमा में सबसे बड़ी सीमा किस राज्य के पास है. इस सीमा को समुद्र तटीय सीमा रेखा यानी Seaside Border कहते हैं. ये राज्य और उनकी सीमा हैं- गुजरात 1215 किमी, आंध्र प्रदेश 973.7 किमी, तमिलनाडु 906.9 किमी, महाराष्ट्र 720 किमी, केरल 569.7 किमी, ओडिशा-476.4 किमी, कर्नाटक 280 किमी और प. बंगाल 157.5 किमी. (फोटोः गेटी)

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पड़ोसी देशों के पास समुद्र में कहां है भारत की आखिरी सीमा. बांग्लादेश के पास न्यू मूर आइलैंड (New Moore Island) पर भारत की आखिरी सीमा है. इंडोनेशिया के पास इंदिरा प्वाइंट (Indira Point), म्यांमार के पास लैंडफॉल आइलैंड (Landfall Island), पाकिस्तान के पास सर क्रीक (Sir Creek), थाईलैंड के पास सिमिलन आइलैंड (Similan Island), श्रीलंका के पास कट्चाथीवू (Katchatheevu) और मालदीव्स के साथ मलिकु कांडू (Maliku Kandu). (फोटोः गेटी)

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