Sai Baba Aarti: इस आरती से करें साईं बाबा को प्रसन्न, जीवन की सभी चिंताएं होंगी दूर

Sai Baba Aarti: शि‍रडी के साईं बाबा भी अवतारी पुरुष के रूप में पूजे जाते हैं. साईं बाबा के पूजन के लिए गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता हैं. कहते हैं जिसका कोई नहीं उसका साईं हैं. किसी भी धार्मिक दायरे से दूर बाबा हर इंसान के दूख-दर्द को दूर करते हैं.

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शि‍रडी के साईं बाबा शि‍रडी के साईं बाबा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 7:00 AM IST

Sai Baba Aarti: साईं बाबा के पूजन के लिए गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता हैं. कहते हैं जिसका कोई नहीं उसका साईं हैं. किसी भी धार्मिक दायरे से दूर बाबा हर इंसान के दूख-दर्द को दूर करते हैं. जो भी सांई राम की शरण में जाता है वो उनके दर से खाली नहीं आता. बाबा को मन से याद करो तो वो सारे संकट दूर कर देते हैं. तो आइए सुनते हैं शिरडी वाले साईं बाबा की आरती. 

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साईं बाबा की आरती

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे। 
भक्तजनों के कारण, उनके कष्ट निवारण॥ 
शिरडी में अवतरे, ॐ जय साईं हरे॥ ॐ जय...॥ 

दुखियन के सब कष्टन काजे, शिरडी में प्रभु आप विराजे। 
फूलों की गल माला राजे, कफनी, शैला सुन्दर साजे॥ 
कारज सब के करें, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ 

काकड़ आरत भक्तन गावें, गुरु शयन को चावड़ी जावें। 
सब रोगों को उदी भगावे, गुरु फकीरा हमको भावे॥ 
भक्तन भक्ति करें, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ 

हिन्दु मुस्लिम सिक्ख इसाईं, बौद्ध जैन सब भाई भाई। 
रक्षा करते बाबा साईं, शरण गहे जब द्वारिकामाई॥ 
अविरल धूनि जरे, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ 

भक्तों में प्रिय शामा भावे, हेमडजी से चरित लिखावे। 
गुरुवार की संध्या आवे, शिव, साईं के दोहे गावे॥ 
अंखियन प्रेम झरे, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ 

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ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे। 
शिरडी साईं हरे, बाबा ॐ जय साईं हरे॥ 
श्री सद्गुरु साईंनाथ महाराज की जय॥ 

साईं बाबा पूजन विधि

सुबह या शाम को साईं बाबा की तस्वीर या मूर्ति की पूजा की जाती है. किसी आसन पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर साईं बाबा की तस्वीर रखें. पूजा के लिए पीले फूल या हार का प्रयोग करें. धूप-दीप जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिए. पूजा के बाद प्रसाद बांटना चाहिए. प्रसाद के रूप में फल या मिठाई बांटी जा सकती है. शिरडी के साईं बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन कराना चाहिए और दान करना चाहिए. इस तरह इस व्रत का समापन होना चाहिए.

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