कुंडली का शनि कर रहा है परेशान, इन चार मंत्रों से होगा निदान

शनि की दृष्टि हर इंसान के लिए टेढ़ी नहीं होती, क्योंकि शनि संतुलन और न्याय के देवता हैं. गलत प्रवृत्ति और बेइमान लोगों को पीड़ित करते हैं. जो इंसान ईमानदारी और मेहनत की जिंदगी जीता है उसे शनि पुरस्कार भी देते हैं.

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जो इंसान ईमानदारी और मेहनत की जिंदगी जीता है उसे शनि पुरस्कार भी देते हैं. जो इंसान ईमानदारी और मेहनत की जिंदगी जीता है उसे शनि पुरस्कार भी देते हैं.

सुमित कुमार / aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2019,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

हर रोज बोला गया एक खास मंत्र आपके जीवन में कमाल दिखा सकता है. किसी भी इच्छा को पूरी करने की क्षमता रखते हैं शनिदेव से जुड़े कुछ खास उपाय करने होंगे. चाहे मनचाही नौकरी हो. सौभाग्य, दौलत, सफलता या सम्मान पाने की इच्छा ही क्यों ना हो. शनिदेव से जुड़े मंत्र आपकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं.

ज्योतिष के जानकार कहते हैं कि शनि के मंत्रों में अद्भुत ताकत है. शनि के मंत्रों के जाप से शीघ्र ही उनकी कृपा मिल जाती है. उनकी महाकृपा क्योंकि शनि कर्मफलदाता है. वो न्यायाधीश हैं. इसलिए शनि की कृपा के बिना जीवनमें सुख शांति संभव ही नही हैं.

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अगर आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान हों. तो भी इशनि के मंत्रों के जाप से आपके कष्टों को निवारण हो सकता है या यूं कहें कि शनि देव के मंत्रों का जाप करने से हर बाधा हर विपदा दूर हो सकती है.

मान्यता है कि शनिदेव को महादेव ने न्याय का देवता बनाया है और शनिदेव ही इस कलियुग में मनुष्यों को पापों का हिसाब करते हैं. उन्हें उनके पापों के हिसाब से सजा भी देते हैं. लेकिन ज्योतिषी कहते हैं कि पाप कर्मों से तौबा कर लेने और फिर शनिदेव के मंत्रों के जाप से उसे प्रसन्न होते हैं. शनि के क्रोध से कोई नहीं बचा है. शनि की टेढ़ी नजर जिस इंसान पर पड़ती है उसका जीवन कष्टों से भर जाता है

किसे कष्ट और किसे सुख देंगे शनि

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शनि की दृष्टि हर इंसान के लिए टेढ़ी नहीं होती, क्योंकि शनि संतुलन और न्याय के देवता हैं. गलत प्रवृत्ति और बेइमान लोगों को पीड़ित करते हैं. जो इंसान ईमानदारी और मेहनत की जिंदगी जीता है उसे शनि पुरस्कार भी देते हैं. जहां से सूर्य का प्रभाव खत्म होता है. वहीं से शनि का प्रभाव शुरू होता है. इसलिए शनि पूजन के लिए देर शाम या रात का समय सबसे उत्तम माना जाता है.

शनि को अनुकूल बनाने के आसान मंत्र

पहला मंत्र

सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः

मंदचार प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु में शनिः

इस मंत्र के जाप से शनि जाने-अनजाने में हुए पापों और कष्टों से छुटकारा देते हैं

दूसरा मंत्र

नीलांजन समाभासं रवि पुत्रां यमाग्रजं।

छाया मार्तण्डसंभूतं तं नामामि शनैश्चरम्।।

इस मंत्र के जाप से शनि इंसान को सम्मान और सुख देते हैं

तीसरा मंत्र

ओम शं शनैश्चराय नमः।

ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।

कण्टकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा।।

शं शनैश्चराय नमः।

इस मंत्र के जाप से जीवन में फैली अशांति दूर होती है, बिगड़े काम बनने लगते हैं

चौथा मंत्र

ओम शं शनैश्चराय नमः।

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु कृष्णौ रौद्रान्तको यमः।

सौरि शनैश्चरा मंद पिप्पलादेन संस्थितः।।

ओम शं शनैश्चराय नमः।

इस मंत्र के जाप से शनि देव इंसान को उसके सभी बुरे कर्मों के फल से मुक्ति देते हैं.

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