चाणक्य नीति: जीवनभर इन 4 चीजों से संतुष्ट नहीं हो पाता इंसान, हो जाता है बर्बाद

Chanakya Niti In Hindi: मनुष्य अपने जीवन में सुख की प्राप्ति के लिए अनेक चीजों की तलाश करता है, उनके पीछे भागता है और एक बेहतर जीवन के लिए उन्हें पाने की कोशिश करता है. इसमें धन-दौलत, ऐश्वर्य, सम्मान, शारीरिक व मानसिक सुख समेत कई चीजें शामिल हैं. लेकिन कुछ चीजों के मामले में मनुष्य जीवन भर असंतुष्ट रहता है. चाणक्य अपने श्लोक में ऐसी 4 चीजों का उल्लेख करते हैं जिनके लिए मनुष्य जीवन भर लालायित रहता है.

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Chanakya Niti In Hindi (चाणक्य नीति) Chanakya Niti In Hindi (चाणक्य नीति)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2020,
  • अपडेटेड 3:42 PM IST

Chanakya Niti In Hindi: मनुष्य अपने जीवन में सुख की प्राप्ति के लिए अनेक चीजों की तलाश करता है, उनके पीछे भागता है और एक बेहतर जीवन के लिए उन्हें पाने की कोशिश करता है. इसमें धन-दौलत, ऐश्वर्य, सम्मान, शारीरिक व मानसिक सुख समेत कई चीजें शामिल हैं. लेकिन कुछ चीजों के मामले में मनुष्य जीवन भर असंतुष्ट रहता है. चाणक्य अपने श्लोक में ऐसी 4 चीजों का उल्लेख करते हैं जिनके लिए मनुष्य जीवन भर लालयित रहता है.

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धनेषु जीवितव्येषु स्त्रीषु भोजनवृत्तिषु।

अतृप्ताः मानवाः सर्वे याता यास्यन्ति यान्ति च॥

इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य कितना भी धन क्यों न कमा ले, उसे और ज्यादा की लालसा लगी रहती है. जीवन भर उसकी यही कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा पैसा प्राप्त हो जाए. ऐसे व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं रहता और कई बार वो और ज्यादा पाने की चाहत में गलत राह को चुन लेता है. ऐसे में पैसे की लालसा उसके जीवन को नष्ट कर देती है.

चाणक्य आयु का भी जिक्र करते हुए कहते हैं कि व्यक्ति जिसने जन्म लिया है वो कभी मरना नहीं चाहता. ऐसे में वो आयु को लेकर कभी संतुष्ट नहीं हो पाता.

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इस श्लोक के अंत में चाणक्य स्त्री और भोजन का जिक्र करते हैं. वो कहते हैं कि मनुष्य इनसे कभी संतुष्ट नहीं होता है. जरूरत के अनुसार चाहत पूरी होने के बाद भी मनुष्य को इनकी लालसा रहती है. ज्यादातर मामलों में इन दोनों के मामले में असंतुष्ट मनुष्य बर्बाद हो जाता है.

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यानी चाणक्य के मुताबिक धन, आयु, स्त्री और भोजन को लेकर मनुष्य कभी संतुष्ट नहीं होता. व्यक्ति को ये जितनी भी मिल जाएं अपर्याप्त रहती हैं. इन पर काबू पा लेने वाला व्यक्ति सुख को प्राप्त करता है और इनके आगे हार जाने वाला मनुष्य नष्ट हो जाता है.

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