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धर्म

सावन का एक सोमवार शेष, भगवान शिव के रुद्राभिषेक से होते हैं ये लाभ

aajtak.in
  • 09 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 7:56 AM IST
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सावन के महीने में भगवान शंकर अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं. इस महीने शिव उपासना का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान रुद्र को सबसे ज्यादा रुद्राभिषेक प्रिय है. कहा जाता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. अगर इस सावन आप भगवान शिव को प्रिय रुद्राभिषेक करना भूल गए हैं तो यहां जानें रद्राभिषेक की महिमा से लेकर उससे जुड़ी सभी जरूरी बातें.

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पुराणों के अनुसार शिव की उपासना करने से व्यक्ति को कई जन्मों के पुण्य का फल मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सावन में महादेव को प्रसन्न करने के लिए रुद्रभिषेक सबसे अचूक उपाय है. रूद्र और शिव एक दूसरे के पर्यायवाची शब्द हैं, रूद्र शिव का प्रचंड रूप है. शिव कि कृपा से सारी ग्रह बाधाओं और समस्याओं का नाश होता है.

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शिवलिंग पर मन्त्रों के साथ विशेष वस्तुएं अर्पित की जाती हैं. इस पद्धति को ही रुद्राभिषेक कहा जाता है. इसमें शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रो का पाठ किया जाता है. सावन में रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ होता है. मान्यता है कि सावन में रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाए जल्दी पूरी हो जाती हैं.

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किस शिवलिंग पर करें रुद्राभिषेक ?
मंदिर के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना काफी उत्तम होता है.
इसके अलावा घर में पार्थिव शिवलिंग पर भी अभिषेक कर सकते हैं .
घर से ज्यादा मंदिर में, इससे ज्यादा नदी तट पर, इससे ज्यादा पर्वतों पर फलदायी होता है.
शिवलिंग के अभाव में अंगूठे को भी शिवलिंग मानकर उसका अभिषेक किया जा सकता है.

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शिवलिंग का अभिषेक किए जाने की परंपरा काफी पुरानी है. ऐसे में अब हम आपको बताते हैं कि भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए शिव के निराकार रूप शिवलिंग का अभिषेक किन वस्तुओं से किया जाता है और उस वस्तु से अभिषेक करने पर क्या लाभ मिलता है.

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कल्याणकारी है रुद्राभिषेक-
-घी की धारा से अभिषेक से वंश का विस्तार होता है.
-इक्षुरस से अभिषेक से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, कुंडली के दुर्योग नष्ट हो जाते हैं
-शक्कर मिले दूध से अभिषेक से व्यक्ति विद्वान हो जाता है.
-शहद से अभिषेक  करने पर पुरानी से पुरानी बीमारियां खत्म हो जाती हैं
-गाय के दूध से अभिषेक से आरोग्य की प्राप्ति होती है
-शक्कर मिश्रित जल से अभिषेक से संतान प्राप्ति सरल हो जाती हैं
-भस्म से अभिषेक करने पर व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर लेता है

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रुद्रभिषेक कब करना अच्छा रहता है और कब नहीं-
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर पूजा उपासना का एक शुभ मुहूर्त होता है और इसीलिए तिथियों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन सावन में तो हर दिन शिव उपासना के लिए शुभ है. कहते हैं सावन में रुद्राभिषेक से शिव की विशेष कृपा मिलती है. इसके अलावा मां गंगा भी झट से अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाती हैं. बावजूद इसके रुद्राभिषेक करते समय कुछ विशेष सावधानियों का पालन जरूर करना चाहिए.

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रूद्राभिषेक में रखें ध्यान-
-बिना शिव जी का निवास देखे कभी भी रुद्राभिषेक न करें.
-इसके परिणाम काफी ख़राब हो सकते हैं
-शिव जी का निवास तभी देखना जरूरी है जब मनोकामना की पूर्ति के लिए अभिषेक किया जा रहा हो.
-शुभ मुहूर्त में की गई उपासना हर मनोकामना पूर्ण कर देती है इसलिए इन सावधानियों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है

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कब करें रुद्राभिषेक-
-हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी तिथि पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं.
-कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या के दिन शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं.
-कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर रहते हैं

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कब करें रुद्राभिषेक-
-शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भी महादेव कैलाश पर रहते हैं
-कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिव जी नंदी पर सवार होकर विश्व भ्रमण पर होते हैं
-शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी को शिव जी विश्व का भ्रमण करते हैं
-इन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है
इन तिथियों में रुद्राभिषेक किया जा सकता है

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कब ना करें रुद्राभिषेक-
-कृष्णपक्ष की सप्तमी, चतुर्दशी को शिव जी श्मशान में समाधि में रहते हैं
-शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी, पूर्णिमा में भगवान शिव श्मशान में समाधि में रहते हैं
-कृष्णपक्ष की द्वितीया, नवमी को महादेव देवताओं की समस्याएं सुनते हैं
-शुक्लपक्ष की तृतीया, दशमी में महादेव देवताओं के साथ सभा करते हैं
-कृष्णपक्ष की तृतीया, दशमी में नटराज क्रीडारत रहते हैं
-शुक्लपक्ष की चतुर्थी और एकादशी को नटराज क्रीडारत रहते हैं.
-कृष्ण पक्ष की षष्ठी, त्रयोदशी को रुद्र भोजन करते हैं
-शुक्ल पक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी में महादेव भोजना करते हैं
-इन तिथियों में अभिषेक नहीं किया जाता है.

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-इन तिथियों पर करें अभिषेक-
-शिवरात्रि, प्रदोष और सावन के सोमवार
-सिद्ध पीठ या ज्योतिर्लिंग का क्षेत्र हो
-ऐसी जगहों और समय पर निवास का विचार करने की जरूरत नहीं होती
-ये स्थान और समय हमेशा मंगलकारी होता है.

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