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धर्म

Ramzan: जानें, रोजा रखने के लिए क्यों जरूरी है सुबह उठकर खाना

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 08 मई 2019,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST
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मुसलमानों के लिए रमजान का महीना सबसे ज्यादा अहम होता है. इस महीने में तमाम मुसलमान रोजा रखते हैं, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है. महीने के 30 दिन तक रोजे रखे जाते हैं. सुबह सवेरे से लेकर शाम सूरज डूबने तक बिना कुछ खाए-पिए रोजा रखा जाता है.



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रोजा रखने के लिए सूरज निकलने से पहले खाते हैं, जिसे सहरी कहते हैं. सहरी का वक्त सूरज निकलने से पहले होता है और सुबह फज्र की आजान होने पर खत्म हो जाता है. इस तरह सुबह फज्र की नमाज के साथ रोजा शुरू होता है और सूरज डूबने तक यानी शाम को मगरिब की आजान होने पर रोजा खोला जाता है.


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इस्लामिक धर्म गुरु का कहना है कि सहरी फर्ज नहीं है, बल्कि सुन्नत है. मतलब अगर सहरी कर के रोजा रखा जाता है तो सवाब मिलता है, लेकिन अगर किसी वजह से आप सहरी नहीं कर पाते हैं यानी आप सुबह में उठकर कुछ खा नहीं पाते हैं तो तभी आप रोजा रख सकते हैं.


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हालांकि, सहरी के बारे में पैगंबर मोहम्मद ने कहा है कि जो इंसान रोजा रखना चाहता है वो सहरी जरूर करे. उन्होंने यह भी कहा है, 'सहरी किया करो, क्योंकि इसमें बहुत फायदा है. सहरी का खाना बड़ा ही मुबारक खाना होता है.' अगर कुछ भी खाने का मन नहीं करता है तो सिर्फ खजूर खा लें या पानी ही पीलें.

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इस्लामिक किताबों में लिखा गया है कि सहरी खाने वालों पर अल्लाह रहमत फरमाते हैं. अल्लाह के फरिश्ते सहरी करने वालों के लिए माफी की दुआएं मांगते हैं.  पैगंबर मोहम्मद ने कहा है कि मुसलमानों के रोजे ईसाई धर्म के मानने वालों से इसलिए अलग होते हैं, क्योंकि ईसाई धर्म के लोग सहरी नहीं करते और मुसलमान सहरी कर के रोजा रखते हैं.

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इस्लामिक धर्म गुरुओं का यह भी कहना है कि सहरी का समय रहमत और बरकत वाला होता है. सहरी के वक्त की जाने वाली दुआएं अल्लाह कुबूल करता है. लेकिन जो लोग आलस में आकर सहरी नहीं करते हैं, वो बदनसीब होते हैं. 

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वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पूरे दिन भूखे रहने के डर से सहरी में जरूरत से ज्यादा ही खा लेते हैं, जिस वजह से इन लोगों को रोजे के दौरान खट्टी डकारें आती हैं, बदहजमी होने लगती है.

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लेकिन जैसे-जैसे समय गुजर रहा है सहरी के तरीकों में काफी बदलाव आ रहा है. यह कहना गलत नहीं होगा कि आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल का असर रमजान की सहरी और इफ्तार पर भी दिखने लगा है. आजकल लोगों ने सहरी को भी अपनी मॉडर्न लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लिया है. जबकि, इस्लाम में सहरी घर में रहकर परिवार के लोगों के साथ बैठकर बहुत सादगी के साथ करने की बात कही गई है. लेकिन आजकल लोग सहरी करने के लिए देर रात बाहर आउटिंग पर जाते हैं. रेस्टोरेंट में तरह-तरह के शाही पकवान- जैसे निहारी, बिरयानी, कबाब खाते हैं. कई परिवारों में तो सहरी की दावतें चलती हैं.

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वैसे मॉडर्न सहरी का तरीका सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन यह सेहत को काफी नुकसान पहुंचाता है. आपको बता दें कि जिन लोगों को दिल और डायबिटीज की बीमारी हो, उनको मॉडर्न सहरी के तरीकों से खुद को दूर ही रखना चाहिए. क्योंकि अनहेल्दी चीजें खाने से सेहत को काफी नुकसान पहुंच सकता है. आइए आपको बताते हैं कि सहरी में किन चीजों का खास ख्याल रखना चाहिए और क्यों...


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इफ्तार से लेकर सहरी तक खाना खाने के समय हाथ अच्छे से धो लेने चाहिए, क्योंकि भूखे रहने पर शरीर में कमजोरी आ जाती है और कीटाणु जल्दी हमला करते हैं.

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गर्मी के रोजों में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी, ऑरेंज जूस और ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए.

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रोजा रखकर धूप में बाहर निकलने से जितना बचेंगे उतना ही आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा.

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इफ्तार और सहरी में ज्यादा से ज्यादा फल और प्रोटीन- फाइबर युक्त वाली चीजें जैसे जैसे-अंडा, आलू, ब्रेड खाएं. खाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आप जो भी खा रहे हैं उसे कम मात्रा में ही खाएं.

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