इस बार पितृपक्ष 24 सितंबर से शुरू होकर 08 अक्टूबर तक रहेगा. मान्यता है कि पितृपक्ष में पितृ धरती पर आकर अपने लोगों पर ध्यान देते हैं और आशीर्वाद देकर उनकी समस्याएं दूर करते हैं.
माना जाता है कि पितृपक्ष पर अपने पितरों के लिए दान करने से व्यक्ति को कई लाभ होते हैं. आइए जानें पितृपक्ष के दौरान क्या दान करना चाहिए और क्यों...
भूमि दान- भूमि या इसके अभाव में केवल मिट्टी का दान करने से यह दान पूर्ण हो जाता है. इससे आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है.
तिल का दान- काले तिलों का दान करने से व्यक्ति को ग्रह और नक्षत्रों की बाधा से मुक्ति मिलती है.
सोने का दान- सोने का दान करने से व्यक्ति को कर्ज और रोगों से मुक्ति मिलती है. सोने के अभाव में केवल दक्षिणा भी दी जा सकती है.
वस्त्र दान- पितृपक्ष में वस्त्र और उपवस्त्र दोनों अलग-अलग दान किए जाते हैं. दान किए गए वस्त्र नए होने चाहिए और फटे हुए नहीं होने चाहिए.
घी का दान- गाय का घी पात्र सहित दान करना चाहिए, इससे पारिवारिक जीवन बेहतर हो जाता है.
अन्न दान- पितृपक्ष में अलग-अलग या कोई एक अनाज दान किया जाता है. इससे वंश वृद्धि सम्भव हो जाती है.
गुड़ का दान- गुड़ का दान करने से पितरों को विशेष संतुष्टि प्राप्त होती है.
नमक का दान- नमक का दान किए बिना कभी भी दान सम्पूर्ण नहीं होता है. नमक का दान करने से भूतप्रेत और आत्माओं की बाधा से मुक्ति मिलती है.
चांदी का दान- चांदी का दान करना परिवार और वंश को मजबूत करता है. चांदी के अभाव में सफ़ेद धातु की कोई वस्तु दान की जा सकती है.
गाय का दान- इस दान को करने से व्यक्ति को निश्चित रूप से मुक्ति की प्राप्ति होती है. व्यक्ति इस दान को प्रत्यक्ष भी कर सकता है और संकल्प से भी.