वृक्षों की महत्ता है कि जो पुण्य अनेकानेक यज्ञ करवाने अथवा तालाब खुदवाने या फिर देवाराधना से भी अप्राप्य है, वह पुण्य महज एक पौधे को लगाने से सहज ही प्राप्त हो जाता है. इससे कई प्राणियों को जीवनदान मिलता है. ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में भी वृक्षों का मनुष्य से संबंध निरूपित किया गया है.
जिन वृक्षों में फल लगना बंद हो गए हों या कम लगते हों, उन्हें कुलथी, उड़द, मूंग, तिल और जौ मिले जल से सींचना चाहिए.
इसके विपरीत पूर्व में पीपल, दक्षिण में पाकड़, पश्चिम में बरगद और घर के उत्तर में गूलर का वृक्ष अशुभ माना गया है.
जिस व्यक्ति के घर में बिल्व का एक वृक्ष लगा होता है, उसके यहां साक्षात लक्ष्मी का वास रहता है.
घर की सीमा में कदली (केला), बदरी (बेर) एवं बाँझ अनार के वृक्ष होने से वहां के बच्चों को कष्ट उठाना पड़ता है.
घर में रेगिस्तानी पौधों का होना शत्रु बाधा, अशांति एवं धनहानि का कारक होता है. कैक्टस के पौधे इसी श्रेणी में आते हैं.
जिस घर की सीमा में पलाश, कंचन, अर्जुन, करंज और श्लेषमांतक नामक वृक्षों में से कोई भी वृक्ष होता है, वहां सदैव अशांति बनी रहती है. बेर का वृक्ष अधिक शत्रु पैदा करता है. बेर का वृक्ष घर की सीमा के बाहर ही शुभ होता है.
अनार का पौधा घर में लगाने से कर्ज से मुक्ति मिलती है. घर में समृद्धि आती है.
बेल वाले पौधे (Creepers): लताओं वाले पौधों को प्रवेश द्वार या
एक्सटीरियर स्पेस जैसे बालकनी में लगा सकते हैं. लेकिन, इस बात का ध्यान
रखें कि लताएं कंपाउंड की दीवार से ऊंचे न चले जाएं.
कृष्णकांता का बेल जिसमे नीले रंग के फूल होते हैं. इसे लक्ष्मी
का स्वरुप मानते हैं. आर्थिक समस्याएं ख़त्म होती हैं.
श्वेतार्क यानि crown flower को गणपति का पौधा भी मानते हैं. ये लगाने से सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होती है.
जिनके घर में नारियल के पेड़ लगे हों, उनके मान-सम्मान में खूब वृद्धि होती है.
हल्दी का पौधा लगाने से घर में नेगेटिव एनर्जी नहीं होती है, इसलिए इस पौधे को घर में जरूर लगाना चाहिए.