शादी से पहले होने वाली रस्में
गोल धाना: गुजराती में सगाई को गोल धाना कहा जाता है. इस प्रथा के अनुसार लड़की वाले दूल्हे के घर पर मिठाई और तोहफों के साथ जाते हैं. वहां पर दोनों लड़का- लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं और फिर दोनों परिवार की पांच विवाहित महिलाओं से आर्शीवाद लेते हैं.
मेहंदी: जैसे हर शादी में मेहंदी की रस्म तो होती ही है, उसी प्रकार से गुजराती शादी में भी इसके महत्व को समझा गया है. शादी से दो दिन पूर्व लड़की वालों के घर पर इस रस्म को बहुत धूम धाम से मनाया जाता है. लड़की के हाथों पर खूबसूरत आकृति वाली मेहंदी लगाई जाती है. परिवार की दूसरी महिलाएं भी इस शुभ अवसर पर अपने हाथों पर मेहंदी लगाती हैं.
संजी: गुजराती में संगीत संध्या को संजी कहकर संबोधित किया जाता है. इस प्रथा को हमने सभी शादियों में देखा भी होगा और खुद अनुभव भी किया होगा. संजी के अंतर्गत दोनों परिवारों को एक दूसरे को और बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलता है. इस अवसर पर गुजराती गाने बजाए जाते हैं और पारंपरिक डांडिया भी खेला जाता है. बता दें, ये समारोह शादी से एक दिन पहले किया जाता है.
मंगल मूहुर्त: मंगल मूहुर्त कार्यक्रम दोनों वर और वधू के घर पर किया जाता है. यह एक प्रकार से भगवान गणेश की पूजा है जिसके माध्यम से ये प्राथना की जाती है कि विवाह का बंधन हमेशा अटूट रहे और इसमें कभी भी कोई बाधा ना आए.
गिरिहा: शांति पूजा गिरिहा शांति पूजा दोनों वर और वधू के घर पर आयोजित की जाती है. इसका उदेश्य सिर्फ इतना होता है कि दोनों घर में सदैव शांति बनी रहे और दोनों परिवार हमेशा स्वस्थ और खुश रहें.
पिथि: गुजराती में हल्दी रस्म को पिथि कहा जाता है. नाम के अनुसार इस रस्म में दुल्हन को हल्दी लगाई जाती है. लड़की को एक स्टूल पर बैठाया जाता है और परिवार की बाकी महिलाएं उसे हल्दी लगाती हैं.
मामेरू: मामेरू प्रथा गुजराती शादी में लड़की की मां का भाई पूरा करता है. इस प्रथा के अनुसार लड़की के मामा उसके लिए ढेर सारे तोहफे लेकर जाते हैं और आशीर्वाद के रूप में उसे देते हैं. उन तोहफों में साड़ियां, गहने मुख्य रूप से होते हैं.
जान प्रथा: जान प्रथा बड़ी ही रोचक रस्म है जिसको देखकर मजा भी आता है और एक संदेश भी मिलता है. इस प्रथा के अनुसार दूल्हा लड़की की मां के पैर छूने के लिए जब आगे बढ़ता है तब लड़की की मां उसकी नाक को पकड़ती है. इस प्रथा का बस यह उदेश्य होता है कि लड़का हमेशा विनम्र और शांत स्वभाव का बना रहे और कभी भी उस में घमंड ना आए.
शादी के समय वरघोड़ा: गुजराती में बारात को वरघोड़ा कहा जाता है. सबसे पहले लड़की की बहन रुमाल में सिक्का लेकर अपने भाई के चारों ओर घुमाती है. इसका मतलब ये होता है कि उसका भाई सदैव बुरी दृष्टि से बचा रहेगा. इसके बाद दूल्हा बारात के साथ घोड़े पर बैठकर निकल पड़ता है.
जयमाला: सब शादियों की भांति गुजराती मान्यता के अनुसार भी सबसे पहले शादी के दिन वर और वधु एक दूसरे को वरमाला पहनाते हैं.
अंतरपात: इस प्रथा में दुल्हन और दूल्हा के बीच में एक पर्दा होता है. गुजराती मान्यता के अनुसार लड़की के अंकल उसे मंडप तक लेकर जाते हैं. बाद में धीरे-धीरे वो पर्दा नीचे किया जाता है.
कन्यादान, हसता मिलाप और वरमाला: ये तीनों ही प्रथा किसी भी शादी की जान होते हैं. सबसे पहले कन्यादान के तहत लड़की के पिता उसका हाथ दूल्हे के हाथ में थमाते हैं. उसके बाद दुल्हन की साड़ी को दूल्हे के शॉल के साथ बांधा जाता है, इसको गुजराती में हस्त मिलाप कहते हैं. इसके बाद एक रस्सी जोड़े के गले में बांधी जाती है जिसका अर्थ होता है वरमाला.
मधुपर्का: मधुपर्का के अनुसार लड़की के घर वाले दूल्हे के चरण धोते हैं और उसको दूध और शहद से बनी एक ड्रिंक ऑफर करते हैं.
जूता चुराई: ये सबसे दिल्चस्प रस्म मानी जाती है. इस रस्म के तहत लड़की की बहनें अपने जीजू की जूतियां चुरा लेती हैं और शर्त रखती हैं कि ये जूतियां तभी मिलेंगी जब उन्हें पैसे मिलेंगे.
मंगलफेरा और सप्तपदि: गुजराती में फेरे वाली रस्म के लिए ये कहा जाता है. लेकिन यहां सबसे बड़ा अंतर ये होता है कि हिंदू शादियों में 7 फेरे लिए जाते हैं जबकि गुजराती शादी में सिर्फ 4 फेरे लिए जाते हैं. वर और वधू 7 कदम साथ में लेते हैं और इसी को सप्तपदि कहा जाता है. इसके बाद दोनों दूल्हा और दुल्हन बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं.
चेरो पकारयो: इस रस्म के तहत दूल्हा अपनी सास की साड़ी को पकड़ता है और उनसे और तोहफों की मांग करता है. फिर दुल्हन की मां सभी तोहफे लड़के के परिवार वालों को दे देती है. बता दें, सभी तोहफे लड़की की मां की साड़ी में ही होते हैं.