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धर्म

गुजराती शादी की 6 रस्में, कोई दूल्हा नहीं चाहेगा उसका पड़े पाला

aajtak.in/मंजू ममगाईं
  • 09 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 6:52 PM IST
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यूं तो आपने कई शादियां देखी होंगी लेकिन बात जब गुजराती शादियों की होती है तो आंखों के आगे रंग-बिरंगे रंग और लजीज खाने की तस्वीरें तैरने लगती हैं. अपने अनोखे रीति रिवाजों और लजीज खाने की वजह से लोग गुजरात को 'छैल छबीलो' गुजरात भी कहते हैं. आज देश के नामी गुजराती अंबानी परिवार के घर पर भी शादी है. आज मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी की शादी हीरा व्यापारी अरुण रसेल मेहता की बेटी श्लोका मेहता के साथ होने जा रही है. इस शादी में भी सभी गुजराती परंपराओं को निभाया जाएगा. शादी के दौरान सभी रस्मों को दूल्हे के साथ कुछ हंसी मजाक छेड़छाड़ करते हुए निभाया जाता है.ऐसे में आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही हंसी मजाक वाली गुजराती रस्मों के बारे में जिन्हें निभाने से हर दूल्हा बचता नजर आता है. देखते हैं आखिर कौन सी हैं वो खास रस्में.

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जान रस्म
यह रस्म शादी के दिन निभाई जाती है. यह रस्म बेहद मजेदार होती है. इस रस्म में शादी के स्टेज पर पहुंचते ही दूल्हा अपनी सास का आशीर्वाद लेने के लिए उसके पैर छूता है. इसी दौरान लड़के की सास झट से उसकी नाक पकड़ लेती है. इस रस्म का उद्देश्य दूल्हे को यब बताना होता है कि वो अपनी लाड़ली बेटी को उसे सौंप रहे हैं इसलिए उसे उनका आभारी होना चाहिए. तो आकाश अंबानी आप भी तैयार हो जाएं इस रस्म को निभाने के लिए.

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वरघोड़ा
गुजराती शादियों में दूल्हे की बहन घर से बारात निकलने से पहले एक कपड़े पर कुछ सिक्के बांधकर अपने भाई के सिर के ऊपर से निकालती हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से उसके भाई को किसी की बुरी नजर नहीं लगती है। इस रस्म के बाद ही दूल्हा घोड़े पर सवार होकर घर से बारात लेकर निकलता है.

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पंचामृत
इस रस्म में लड़की के परिवार वाले दूल्हे के पैरों को पानी से साफ करते हैं. इस दौरान वो दूल्हे को दूध और शहद से बना पंचामृत भी पीने के लिए देते हैं.

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जूता चुराई
भारतीय शादियों में यह रस्म काफी मजेदार होती है. खासकर गुजराती शादियों में जब मधुपरखा नाम की रस्म निभाई जाती है तो उस समय लड़की की बहनें दूल्हें के जूते छिपा देती हैं. इसके बाद अच्छी खासी रकम वसूलने के बाद ही दूल्हे को उसके जूते वापस मिलते हैं.

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छेरो पकरियो
इस रस्म के दौरान हर किसी के चेहरे पर हंसी आ जाती है. इस रस्म में दूल्हा अपनी सास की साड़ी का पल्लू पकड़कर उससे और उपहार मांगता है. जिसके बाद सास की साड़ी के पल्लू को उपहारों से भर दिया जाता है. इन उपहारों को बाद में दूल्हें के परिवार वालों को भेंट में दे दिया जाता है.

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विदाई

इस रस्म के दौरान सिर्फ गुजराती लड़के ही नहीं बल्कि हर दूल्हा असहज महसूस करता है. अपने घर को छोड़ते हुए लड़की के आंखों से जो आंसू निकलते हैं उनका सामना करने से हर लड़का बचना चाहता है. इस रस्म में लड़की चावल हाथ में लिए पीछे की और फेंकती है.

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