Premanand Maharaj: समाज को सुरक्षित और न्यायपूर्ण बनाने के लिए बनाए गए कानून जब अपने उद्देश्य से भटकने लगें, तब सबसे बड़ा संकट पैदा होता है. आज कुछ मामलों में ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां संरक्षण के नाम पर शोषण होने लगा है. भले ही दुनिया में हो रही हलचल से किसी का कोई संबंध ना होता हो, लेकिन जब कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो एहसास होता है कि सामाजिक संतुलन बहुत ही ज्यादा खराब हो रहा है. इन्हीं मामलों से जुड़ा सवाल एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से किया. भक्त का ये सवाल था कि आजकल देश का कानून महिलाओं के अनुकूल होने के कारण बहुत से महिला परिवार इसका दुरुपयोग करते हुए पुरुष परिवारों का शोषण कर रहे हैं, तो ऐसे में क्या किया जाए?
क्या बोले प्रेमानंद महाराज
इस पर प्रेमानंद महाराज उत्तर देते हुए कहते हैं कि न हम समाचार सुनते है, न टीवी देखते है, न मोबाइल रखते है, न किसी संसारी आदमी से मिलते हैं. इसलिए हमें सामान्यतः यह पता नहीं होता कि समाज में क्या हो रहा है. लेकिन जब कभी ऐसी कोई घटना सामने आती है, तब समझ में आता है कि संसार किस दिशा में जा रहा है. कई बार यह देखा जाता है कि परिवार को पता होता है कि उनकी बेटी गलत कर रही है, फिर भी वे उसका सहयोग करते हैं और कहते हैं- 'तू कर, हम तेरे साथ हैं.' इस तरह कुछ लोग एक नहीं, बल्कि दो-तीन या चार परिवारों को भी नुकसान पहुंचाते हैं और धन की लूट करते हैं.
कानून है महिलाओं के समर्थन में
आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि यह सच है कि कानून महिलाओं के समर्थन में इसलिए बनाए गए, क्योंकि पहले समाज में महिलाओं पर अत्याचार बहुत अधिक थे. विवाह के बाद कई पुरुष पत्नी को दासी समझते थे जैसे मारपीट करना, अपमान करना और अमानवीय व्यवहार करना आम बात थी. ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनना बेहद आवश्यक था और यह एक सही कदम था.'
'लेकिन ये कानून स्त्री की रक्षा के लिए हैं, पुरुषों के शोषण के लिए नहीं. जब धर्म, मर्यादा और परलोक का ज्ञान नहीं होता, तब ऐसी गलतियां होती हैं. अज्ञानवश लोग यह नहीं समझ पाते कि वे क्या कर रहे हैं. यह बात भी नहीं है कि केवल महिलाएं ही गलत होती हैं, पुरुषों ने भी बहुत अत्याचार किए हैं, तभी ये कानून बने. कानून का उद्देश्य संरक्षण है, दुरुपयोग नहीं. उसका लाभ उठाइए, लेकिन उसका गलत इस्तेमाल मत कीजिए. क्योंकि अंततः न्याय भगवान ही करेंगे. तब कोई बच नहीं पाएगा. '
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