Hanuman Jayanti 2023: साल में दो बार हनुमान जयंती मनाई जाती है- एक चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को और दूसरी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि. हनुमान जयंती का दिन हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. माना जाता है कि हनुमान जयंती अगर सप्ताह में मंगलवार या फिर शनिवार के दिन पड़ती है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
हनुमान जयंती का दिन राम भक्तों और हनुमान भक्तों के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है. बजरंगबली के भक्त इस दिन को बेहद ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाते हैं. एक बार भगवान राम की लंबी उम्र की कामना करते हुए हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था. कहा जाता है तब से ही भगवान हनुमान को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई. कुछ लोग हनुमान जयंती को ही हनुमान जन्मोत्सव कहते हैं. आइए जानते हैं कि हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव में क्या अंतर है. क्या इन दोनों को एक कहना ठीक होगा. जानते हैं इसके पीछे का कारण.
हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव में क्या है अंतर ?
कुछ लोग हनुमान जन्मोत्सव कहते हैं और कुछ लोग हनुमान जयंती कहते हैं. हिन्दू पंचांग में कही पर हनुमान जयंती लिखा होता है और कुछ जगहों पर हनुमान जन्मोत्सव भी लिखा होता है. लेकिन मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी के जन्मदिन को जयंती नहीं बल्कि जन्मोत्सव कहा जाना उचित होगा. दरअसल, जयंती और जन्मोत्सव दोनों का तात्पर्य जन्मदिन से होता है. लेकिन, जयंती का प्रयोग उनके लिए किया जाता है, जो जीवित है ही नहीं. लेकिन यहां बात भगवान हनुमान करी जाए तो इन्हें कलयुग का अमर देवता माना गया है.
हनुमान आठ चिरंजीवी में से एक हैं. उन्हें अमर होने का वरदान प्राप्त है. कहा जाता है कि भगवान राम से अमर होने का वरदान पाने के बाद हनुमान जी ने गंधमादन पर्वत पर निवास बनाया और इसी स्थान में कलयुग में धर्म के रक्षक के रूप में हनुमान जी निवास करते हैं. इसलिए हनुमान जी के जन्मदिन की तिथि को जयंती के बजाय जन्मोत्सव कहना उचित होगा. जब कोई अमर होता है तो उसके साथ जयंती शब्द प्रयुक्त नहीं करना चाहिए.
जयंती और जन्मोत्सव में अंतर
1. जन्मदिन और जयंती में बहुत अंतर है. जन्मदिन जीवित लोगों के लिए मनाया जाता है और जयंती उन लोगो के जन्मदिवस को कहते है जो आज हमारे बीच नहीं है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है.
2. साथ ही जन्मोत्सव किसी भी ईश्वरीय अवतार जैसे कि भगवान श्री राम, कृष्ण या हनुमान जी के जन्मदिवस को सम्बोधित करने के लिए जन्मोत्सव शब्द का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इनके जन्म को हमारे देश में उत्सव के रूप में मनाया जाता है इसलिए इसे जन्मोत्सव कहा जाता है. इनके जन्मदिवस को जन्मदिन या जयंती जैसे शब्दों से सम्बोधित नहीं किया जाता है.
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